करोना महामारी ने वर्ष 2020 को नाकारात्मक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। महामारी के होने वाली मौतों से लोग जहां अपनों को खो रहे हैं वहीं कोरोना के कारण छायी आर्थिक मंदी से रोजगार व काम धंधे ठप्प पडऩे से लोग मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। कोरोना के चलते हिमाचल प्रदेश में एक बड़ी आबादी मानसिक तनाव के दौर से गुजर रही है।

दिनों में ही ऊना, शिमला, कांगड़ा और सोलन में ऐसे आत्महत्या के ऐसे मामले सामने आए हैं जो कि पूरी तरह से उक्त कारणों से जुड़े हुए थे। वहीं इसी बीच नागालैंड के पूर्व राज्यपाल और सी.बी.आई. निदेशक और हिमाचल पुलिस प्रमुख के अहम ओहदों पर रह चुके अश्विनी कुमार द्वारा आत्महत्या के मामले को भी कहीं न कहीं कोरोना काल में पनपे मानिसक तनाव से ही जोडक़र देखा जा रहा है। अचानक से राज्य में मानसिक तनाव से बड़ रहे मामलों को लेकर राज्य सरकार भी गंभीर दिख रही है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से चर्चा के बाद राज्य के पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने सभी पुलिस अधिकारीयों को आत्महत्या के हरेक मामले की गंभीरता से जांच कर उनकी तह तक जाने के आदेश जारी किए हैं।

अब तक 657 कर चुके अपनी जिंदगी खत्म

हिमाचल प्रदेश में जनवरी से लेकर अब तक 657 लोग आत्महत्या कर अपनी जिंदगी खत्म कर चुके हैं। इस आंकड़े में सबसे ज्यादा मामले मई माह से लेकर अब तक के हैं। कोरोना महामारी फैलने के बाद राज्य में मई माह में 89, जून में 112, जुलाई में 101 और अगस्त व सितंबर में 191 लोगों ने विभिन्न कारणों के चलते अपनी जिंदगी अपने हाथों खत्म की है। कई मामलों में तो यह भी सामने आया है कि बेरोजागारी, आय के साधनों में अचानक कमी आने, काम-धंधा ठीक न चलने, गाड़ी की किश्त न देने, वेतन न मिलने तथा घर का खर्च न चला पाने के कारण पनपे मानसिक तनाव के चलते लोगों ने आत्महत्या की है। राज्य में यह क्रम लगातार बढ़ता देखने को मिल रहा है।

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