हल्दी से कुरकुमा लोंगा की प्रचलित होम्योपैथिक दवा का निर्माण होता है. दो तरह की हल्दी ज्यादा प्रचलित हैं सलेम और वायगांव. जहां सलेम हल्दी में कुरकुमा लोंगा की मात्रा 2-3% होती है. वहीं वायगांव हल्दी में यह 4-5% होती है.

महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा इलाके ऐसे हैं, जहां किसानों की आत्महत्याओं के केस बड़ी संख्या में सामने आते हैं. देश के सबसे ज्यादा सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी इन इलाकों का शुमार होता है. लेकिन यहां सितंबर जैसे महीने में होने वाली भारी बारिश भी किसानों को फायदे की जगह नुकसान अधिक पहुंचा जाती है. लेकिन कहते हैं न इनसान कुछ ठान ले तो क्या नहीं कर सकता. ऐसी ही कुछ कहानी है विदर्भ के वर्धा के पास गांव से ताल्लुक रखने वाले राहुल सुपारे नाम के नौजवान की.  

30 वर्षीय राहुल सुपारे इलेक्ट्रॉनिक एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर हैं और ढाई-तीन साल पहले तक जॉब कर रहे थे. किसान परिवार से ताल्लुक रखने की वजह से राहुल खेती की बारीकियों से परिचित हैं. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि वो बचपन से पिता के साथ खेतों में जाते रहे थे. पिछले कुछ साल से राहुल के पिता हल्दी की खेती कर रहे हैं. हल्दी की प्रोसेसिंग कर बाजार में बेची जाती है.

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