शहीद जवानों के परिजनों को मिलेगी सरकारी नौकरी

शहीद जवानों के परिजनों को मिलेगी सरकारी नौकरी

आश्रयविहीन लोगों को मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण से मिलेगी छत


आश्रयविहीन लोगों को मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण से मिलेगी छत

लखनऊ। योगी सरकार प्रदेश के रहने वाले शहीदों के परिजनों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देगी। यह योजना एक अप्रैल 2018 से लागू होगी। प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य ऐसी योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले जनजातियों और अतिनिर्धन वर्ग के लोगों को मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण के माध्यम मकान दिए जाने का निर्णय लिया गया है।

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मुुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में संपन्न कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश के मूल निवासी शहीद जवानों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी देने का फैसला किया है। सशस्त्र सेना के तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेन, वायु सेना) और अद्र्धसैनिक बलों में कार्यरत जवान के शहीद होने पर उनके किसी एक आश्रित को सरकारी सेवा दी जाएगी। कैबिनेट ने आश्रितों की श्रेणी भी तय की है, जिसमें पत्नी, पुत्र, अविवाहित पुत्री, दत्तक पुत्र/पुत्री, माता-पिता शामिल हैं। यदि शहीद जवान अविवाहित है तो इस दशा में उसके माता-पिता, अविवाहित भाई-बहन और विवाहित भाई को नौकरी मिलेगी। शहीद के आश्रित के किसी सदस्य की भर्ती के लिए यह आवश्यक होगा कि वह पद के लिए शैक्षित अर्हताओं के साथ ही 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो। शहीद आश्रितों की भर्ती विभागों में रोस्टर प्रणाली से की जाएगी और यदि विभाग में पद रिक्त नहीं है तो ऐसे समायोजन के लिए विभाग में पद सृजित किए जाएंगे। शहीदों के आश्रितों की नियुक्ति को रोस्टर निर्धारण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित हाई पावर कमेटी, जिसमें रोस्टर में शामिल विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव सदस्य होंगे। सशस्त्र बल के तीनों सेनाओं के शहीद आश्रितों के लिए सैनिक कल्याण विभाग और अद्र्धसैनिक बल के आश्रितों के लिए गृह विभाग नोडल विभाग होंगे। जो समय-समय पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठकें आयोजित करेंगे।

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ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदा के कारण छतविहीन और आश्रयविहीन लोगों के लिए राज्य सरकार मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण शुरू करने जा रही है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र के ऐसेे परिवारों को आवास दिए जाएंगे जो कालाजार, जापानी इंसेफेलाइटिस, एईएस जैसी बीमारियों से प्रभावित हैं और कच्चे, जर्जर घरों में रह रहे हैं। इसके साथ ही जिलाधिकारी द्वारा प्रमाणित वनटांगिया एवं मुसहर वर्ग के आश्रयविहीन लोगों को ऐसे मकान दिए जाएंगे। इसके साथ ही सामाजिक, आर्थिक एवं जातिगत जनगणना 2011 के आंकड़ों पर आधारित आवासीय सुुविधा के लिए तैयार की गई वर्तमान पात्रता सूची में सम्मिलित नहीं हैं उन्हें भी इस योजना के तहत नि:शुुल्क आवास उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना में ग्रामीण क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा के कारण बेघर हुए ऐसे लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा,  जिनके घर क्षतिग्रस्त होने के बाद राजस्व विभाग से 95100 रुपए की धनराशि की मदद मिल चुकी हो। यह योजना शतप्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित होगी।

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आवास का आवंटन प्राथमिकता के आधार पर परिवार के महिला सदस्य अथवा संयुक्त रुप से पति-पत्नी के नाम होगा। यदि परिवार में महिला सदस्य का निधन हो चुका हो तो पुरूष के नाम पर आवास का आवंटन किया जाएगा। आवास का क्षेत्रफल 25 वर्ग मीटर होगा, जिसमें रसोईघर के लिए भी स्थान चिन्हित होगा। आवास की इकाई लागत सामान्य क्षेत्रों में 1.20 लाख रुपए तथा नक्सल प्रभावित जनपदों (चंदौली, मीरजापुुर, सोनभद्र) में 1.30 लाख रुपए होगी। धनराशि सीधे लाभार्थी के खाते में तीन किश्तों में भेजी जाएगी। आवास के साथ शौचालय का निर्माण स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा से कराया जाएगा।

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