यूपी : गठबंधन के बाद इन सीटों पर चुनाव लड़ेगी सपा, बसपा और कांग्रेस

यूपी : गठबंधन के बाद इन सीटों पर चुनाव लड़ेगी सपा, बसपा और कांग्रेस



Lucknow. आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने अपनी रणनीति में बदलाव करने का फैसला लिया। मायावती ने यह फैसला 2012 से लेकर 2017 के विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद लिया। 2019 के चुनावों को देखते हुए मायावमी ने पार्टी में कुछ परिवर्तन कर नए नेताओं को अहम पदों पर बिठाया। मायावती ने प्रयोग के तौर पर बीते उपचुनावों में समाजवादी पार्टी से गठबंधन किया। गठबंधन के बाद भाजपा की करारी हार हुई। इसके बाद बसपा को लगा कि गठबंधन से ही भाजपा को मात दी जा सकती है। हालांकि अभी किसी भी दल से मायावती ने गठबंधन के लिए आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए बसपा प्रमुख ने संगठन को फिर से खड़ा करने के लिए काम करना शुरू कर दिया। कई कद्दावर नेताओं को पार्टी से बाहर किया तो नए और करीबी नेताओं के बड़े ओहदे पर बैठाया। वहीं, मायावती अपने खास रणनीतिकारों के साथ कैडर को दोबारा खड़ा करने की रणनीति बनाई तो वहीं यूपी के लोकसभा उपचुनाव में सपा को समर्थन देकर अपनी ताकत परखी। भजापा की हार के बाद मायावती महगठबंधन के प्लान की तरफ कदम बढ़ा दिए और उनके बिना बुलावे पर अखिलेश यादव और राहुल गांधी खुद गठबंधन का हिस्सा बनने की रजामंदी दे दी।

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जानकारों की कहना है कि सपा, बसपा और कांग्रेस के साथ आने से भाजपा के अंदर जबरदस्त बेचैनी है, क्योंकि अगर ये तीनों दल साथ आ गए तो यूपी की 80 में से 75 सीटें जीतने का सपना भाजपा का अधूरा रह सकता है। क्योंकि मायावती दो चुनावों में सीट चाहे कम ही पाई हो पर उनका वोट प्रतिशत बढ़ा है और सपा, कांग्रेस के साथ आने से यूपी में बड़ा उलटफेर कर सकती हैं। सूत्रों की मानें तो मायावती के एक करीबी नेता हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर, और जिग्नेश मेवाणी के संपर्क में है और लोकसभा चुनाव में तीनों युवा नेता मायावती के साथ चुनावी रैलियों में दिखेंगे।

सपा, बसपा और कांग्रेस के गठबंधन के बाद सीटों को लेकर जो बात सामने निकल कर आ रही है। उसके मुताबिक कानपुर नगर से कांग्रेस तो रनिया-अकबपुर से बसपा का उम्मीदवार चुनाव के मैदान में होगा। वहीं इटावा, मैनपुरी, कन्नौज और मिश्रित सीट पर अखिलेश यादव साइकिल दौड़ाएंगे। वहीं फतेहपुर, फर्रूखाबाद, जालौन, झांसी, बांदा, हमीरपुर-महोबा से बसपा के उम्मीदवार चुनाव के मैदान में होंगे। इस लिहाज से जहां अखिलेश को उनके वोट बैंक के तहत सीटें दी गई हैं, वहीं कांग्रेस से एक सीट छीन ली गई है। सूत्रों की मानें तो रनियां-अकबरपुर से बसपा दूसरे नंबर पर रही थी, जबकि कांग्रेस बुरी तरह से चुनाव हार गई थी। इसी के चलते ये सीट भी बसपा अपने पास रखना चाहती है। इस सीट से पूर्व सांसद राजाराम पाल अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं।

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