बोफोर्स केस: हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ 12 साल बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीबीआई

बोफोर्स केस: हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ 12 साल बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीबीआई



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बोफोर्स केस: हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ 12 साल बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीबीआई

नई दिल्ली। बहुचर्चित बोफोर्स तोप सौदा मामले में हाई कोर्ट के 12 साल पुराने फैसले के खिलाफ सीबीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सीबीआई ने हाई कोर्ट के 31 मई, 2005 के फैसले के खिलाफ अपील दायर की है। बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 2005 में 64 करोड़ रुपए के बोफोर्स मामले में आरोपियों के खिलाफ सारे आरोप निरस्त करने फैसला दिया था। इस फैसले में उच्च न्यायालय ने यूरोप में रह रहे उद्योगपति हिन्दुजा बंधुओं और बोफोर्स कम्पनी के खिलाफ सारे आरोप निरस्त कर दिए थे ।हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ 12 साल बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंची सीबीआई…

नए सबूतों के आधार पर सीबीआई ने अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से बात की और इसके बाद ये फैसला लिया। साल 1986 में 1437 करोड़ रुपए के बोफोर्स तोप घोटाले में भारतीय अधिकारियों को 64 करोड़ रुपए घूस देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अब सीबीआई हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल कर रही है। सीबीआई ने इस मामले में 31 मई 2005 को दिल्ली हाईकोर्ट के दिए फैसले को अभी तक सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी थी।

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राजनीतिक दृष्टि से संवदेनशील 64 करोड़ रुपए के बोफोर्स तोप सौदा मामले में कानूनी लड़ाई लड़ रहे भाजपा के नेता ने 30 जनवरी को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से आग्रह किया था कि सीबीआई को इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में दो फरवरी को सुनवाई होनी है। अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल को भाजपा नेता एवं अधिवक्ता अजय अग्रवाल ने लिखे पत्र में आरोप लगाया कि ‘इस मामले में कोई जवाब दाखिल नहीं करने का ‘एक गलत और प्रायोजित निर्णय लिया गया है।

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भाजपा नेता अजय अग्रवाल ने रायबरेली से कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। अग्रवाल का यह पत्र महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि अटॉर्नी जनरल, जिन्होंने सीबीआई को अपील नहीं दायर करने की सलाह दी थी, ने 12 साल से लंबित आपराधिक अपील में प्रतिवादी के रूप में एजेन्सी द्वारा अपना रुख रखे जाने की हिमायत की थी। वेणुगोपाल की राय थी कि जांच एजेंसी को सुप्रीम कोर्ट विशेष अनुमति याचिका दायर नहीं करनी चाहिए, क्योंकि 12 साल बीत चुके हैं और अब कोई भी याचिका दायर होने की स्थिति में उसके अत्यधिक विलंब के आधार पर खारिज होने की संभावना है।

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हालांकि, अग्रवाल ने अटॉर्नी जनरल को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि ऐसा लगा था कि उनके मामले में जवाब दाखिल नहीं करने का फैसला निचले स्तर पर लिया गया है और ‘यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में बोफोर्स मामला ठहर नहीं सके। उन्होंने पत्र में आगे लिखा है कि मैं आपसे स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि यह संभव है कि कुछ अधिकारियों ने आरोपी व्यक्तियों के साथ सांठगांठ कर ली हो और वे इस मामले को पटरी से उतारने पर तुले हों। भाजपा नेता ने आगे लिखा, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने और इस मामले को पटरी से उतारने के लिए आरोपी व्यक्तियों के साथ सांठगांठ करने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की आवश्यकता है।

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