भीषण ठंड में धधक रहीं कच्ची शराब की भट्ठियां

भीषण ठंड में धधक रहीं कच्ची शराब की भट्ठियां

आबकारी विभाग और पुलिस का संरक्षण है प्राप्त


आबकारी विभाग और पुलिस का संरक्षण है प्राप्त

गोला गोकर्णनाथ, खीरी। भीषण ठंड में आबकारी, वन विभाग और पुलिस महकमे की सुस्ती के चलते क्षेत्र के जंगल से सटे तमाम गांवों में कच्ची शराब का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है और नशेडिय़ों की तादाद के साथ ही छिटपुट अपराध भी बढ़ रहे हैं। वहीं, सरकार को प्रतिवर्ष लाखों रुपए की राजस्व हानि हो रही है।

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क्षेत्र में कच्ची शराब एक कुटीर उद्योग बन गया है। अवैध कच्ची शराब का धंधा खूब फल-फूल रहा है। वहीं, कच्ची शराब की भट्ठियां एक ओर बढ़ते अपराधों का सबब बन रही हैं। कोतवाली क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम भुसौरिया में इसका अवैध कारोबार सबसे अधिक फैला हुआ है। जहां पुरुषों द्वारा गन्ने के खेतों में अवैध कच्ची शराब बनाते हैं। वहीं, इन लोगों के घर की महिलाएं, बच्चे अवैध शराब बेचने का काम करते हैं। इसके अतिरिक्त रामपुर, तकिया, रामपुर गोकुल, पनाह रसूलपुर, भटपुरवा कॉलोनी समेत तमाम गांवों में कच्ची शराब की भट्ठियां धधक रही हैं।

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ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस का इन शराब उत्पादकों से नियमित संपर्क बना रहता है आबकारी विभाग भी छापेमारी तभी मारती है, जब ये लोग पैसा देने में आनाकानी करते हैं। सरकारी ठेकों की शराब के महंगे होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची शराब की खपत है। बढ़ती कमाई के कारण कुछ बड़े लोग भी इसके आकर्षण से बच नहीं पाए है, जिसके चलते कच्ची शराब के कुटीर उद्योग को सफेदपोशों का संरक्षण भी मिलने लगा है। अवैध शराब के इस उद्योग से जहां ग्रामीण क्षेत्र के युवा और किसान तेजी से नशे की गिरफ्त में घिरते जा रहे हैं। वहीं, अपराधों का ग्राफ भी बढ़ रहा है, जिससे कानून व्यवस्था की समस्या के अलावा शासन को राजस्व की भारी क्षति हो रही है।

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हैदराबाद थाना क्षेत्र के ग्राम अयोध्यापुर, साहबगंज, देवीपुर, उदयपुर, बोझवा, मोतीपुर, अशर्फीगंज, बुधेली, महेशपुर व कन्हैयागंज समेत तमाम गांवों में कच्ची शराब बनाने और बेचने का धंधा तेजी से पनप रहा है। जहां दिनभर पियक्कड़ों की आवाजाही बनी रहती है और झगड़ा झंझट आए दिन की बात है। ग्रामीण बताते हैं कि आबकारी विभाग और पुलिस के कुछ हल्का इंचार्जों व सिपाहियों को बाकायदा इस ओर से आंखें फेरे रहने पर माहवारी भी मिलती है। आबकारी विभाग व पुलिस प्रशासन बसूली न हो पाने की दशा में रस्मअदायगी कर इतिश्री कर लेती है। जिससे शराब कारोवारियों के हौंसले बुलंद हैं।

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