जगदगुरू रामानन्दाचार्य थे रामतारक मन्त्र के पुरोधा : डॉ. ममता शास्त्री

जगदगुरू रामानन्दाचार्य थे रामतारक मन्त्र के पुरोधा : डॉ. ममता शास्त्री



अयोध्या। जगदगुरू रामानंदाचार्य सनातन धर्म के सुमेरू और  सामाजिक समरस्ता के महान पोषक थे, जिनकी छाया से आज रामानंद सम्प्रदाय ही नही सम्पूर्ण विश्व का हिन्दू समाज ज्ञान, भक्ति व वैराग्य से अवलौकित हो रहा है। उक्त बातें श्री रामानन्द जी का मन्दिर दर्शन भवन जानकीघाट की महन्त डॉ. ममता शास्त्री ने जगद्गुरू रामानंदाचार्य की 718 वीं जयन्ती के अवसर पर व्यक्त की।

उन्होंने कहा आद्य जगद्गुरू रामानंदाचार्य जी महाराज का जीवन समाजिक उत्थान और हिन्दू समाज के लिए अनुकरणीय रहा है। जगद्गुरू ने रामभक्ति के माध्यम से एक सामाजिक क्रांति का सूत्रपात किया। अयोध्या के क्रम में रामानंदाचार्य जी ने इसी भूमि पर निवास किया। इसलिए इस स्थान को रामानंद जी के मन्दिर के नाम से भी जानते हैं।

इस मन्दिर में जगद्गुरू की सबसे प्राचीनतम प्रतिमा स्थापित है। पूरे देश में जगद्गुरू रामानंदाचार्य की ऐसी मूर्ति कही नही है। यह मूर्ति आशीर्वाद मुद्रा में है, जिसमें जटा, दाढ़ी इत्यादि है। इस पृथ्वी पर भगवान राम ही आचार्य रामानंदाचार्य के रूप में आए। डॉ. ममता ने कहाकि जगद्गुरू रामानंदाचार्य सनातन धर्म के प्रर्वतक हैं। रामतारक मन्त्र के यह पुरोधा भी हैं। आज के परिवेश में लोगों को आचार्य की जयन्ती मनानी चाहिए।

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उन्होंने  बताया कि जगद्गुरू की जयन्ती  पर मन्दिर में स्थापित रामानंद जी की प्रतिमा का वैदिक मन्त्रों के द्वारा पूजन-अर्चन किया गया। तत्पश्चात 11वैदिक ब्राह्मणों द्वारा श्री सूक्त, पुरूसूक्त व राष्ट्राध्यायी अध्याय का सामूहिक पाठ हुआ। उसके बाद सभी वैदिक ब्राह्मणों को प्रसाद ग्रहण कराकर सम्मान किया गया। सायंकाल मणिराम दास छावनी से निकली जगद्गुरू की शोभायात्रा का स्वागत महन्त ममता शास्त्री की देख-रेख में हुआ और भक्तों को हलुआ प्रसाद  वितरित किया गया।

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