अयोध्या रामजन्म भूमि मामला: विश्व शांति मंडल के प्रस्ताव को विहिप समेत संत-धर्माचार्यों ने किया खारिज

अयोध्या रामजन्म भूमि मामला: विश्व शांति मंडल के प्रस्ताव को विहिप समेत संत-धर्माचार्यों ने किया खारिज



अयोध्या। रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में विश्व शांति मंडल के प्रस्ताव को विहिप और उससे हुए जुड़े संत-धर्माचार्यों ने खारिज कर दिया। श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज ने कहा कि अस्थाई मंदिर बन चुका है। अब शीघ्र ही रामलला श्रीरामजन्मभूमि न्यास द्वारा तराश कर रखे गए पत्थरों से निर्मित होने वाले भव्य मंदिर मे विराजमान होंगे।

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श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज ने कहा कि सात अक्टूबर 1984 को माता सरयू की पवित्र भूमि पर बैठकर जो महासंकल्प ताला खुलवाने और बाद मे प्रयागराज की धर्मसंसद मे मंदिर निर्माण का मॉडल तैयार कर रामभक्तों ने लिया, उसकी पूर्णता होने वाली है।

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केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल सदस्य व सद्गुरूसदन गोलाघाट के महंत शिया किशोरी शरण महाराज ने कहा श्रीराम जन्म भूमि पर विराजमान रामलला जीवंत हैं उनका दर्शन पूजन पुजारी और भक्तों के द्वारा नित्य किया जा रहा है। समय निकट है कि अब करोड़ों हिन्दुओं के आस्था और श्रद्धा का केंद्र श्रीरामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान होंगे। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों का संघर्ष और 70 वर्ष का अदालती चक्कर अब समाप्त होना चाहिए।

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वहीं, अयोध्या संत समिति अध्यक्ष सनकादिक आश्रम के महंत कन्हैया दास ने कहा कि सम्पूर्ण अयोध्या हिन्दुओं के आराध्य भगवान श्रीरामलला की है। राजाराम यहां के शासक थे न कि बाबर और ईसा, तो फिर उनकी भूमि पर मस्जिद और गिरजाघर बनाने की वकालत क्यों।

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विहिप प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि महाराष्ट्र से अयोध्या पहुंचे विश्व शान्ति केंद्र के प्रतिनिधिमंडल सदस्य बुद्धिमान तो नहीं दिखते है? नहीं तो वह गैर जिम्मेदाराना सिगूफा नहीं छोड़ते। श्रीराम की जन्मभूमि परिसर में मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर और गुरूद्वारा निर्माण की बात करने वाले विश्व शांति केन्द्र का प्रतिनिधिमंडल या तो मानसिक विक्षिप्त है या फिर देश में आग लगाने का षडयंत्र रचने अयोध्या पहुंचा है। हिन्दुओं के पंथों में विभाजन कर हिन्दुओं से सिक्खों और बौद्धों को अलग करने की साजिश रची जा रही है।

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