कोल्ड डायरिया के मरीज समय से कराएं इलाज: डॉ. शरद वर्मा

कोल्ड डायरिया के मरीज समय से कराएं इलाज: डॉ. शरद वर्मा



गोला गोकर्णनाथ, खीरी। ठंड बढ़ते ही कोल्ड डायरिया ने दस्तक दे दी है। खासतौर से छोटे बच्चे इससे प्रभावित हो रहे हैं। शीतलहर के चलते लोगों में उल्टी दस्त, बुखार जैसे रोग भी देखने को मिल रहे हैं। डॉ. शरद वर्मा ने कहा कि ठंड में दस्त आने पर लापरवाही बरतने पर कोल्ड डायरिया होने का खतरा बढ़ जाता है। डायरिया में सही समय पर इलाज न मिलने पर व्यक्ति की मौत भी हो सकती है। आम तौर पर डायरिया इतना बड़ा रोग नहीं है लेकिन इसमें समय पर इलाज की जरूरत होती है।

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दिसम्बर माह के अंत में पारा धीरे-धीरे नीचे पहुंच रहा है। ठंड बच्चों और बुर्जगों पर अधिक असर डाल रही है। बुजुर्ग जहां अस्थि और संधि दर्द के शिकार हो रहे हैं, वहीं छोटे बच्चों में कोल्ड डायरिया की शिकायतें सामने आ रहीं हैं। ठंड में हृदय रोगियों को भी अपना ध्यान रखना चाहिए। सर्दी के कारण आजकल अस्पतालों में प्रतिदिन आने वाले बच्चों में 70 से 80 प्रतिशत बच्चे सर्दी की वजह से बीमार होकर आ रहे हैं। इन दिनों अस्पतालों में आने वाले बच्चों में 70 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो सर्दी के इन्फेक्सन से पीडि़त हैं।

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बच्चों में वायरल, निमोनिया और कोल्ड डायरिया जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। मौसम परिवर्तन होने के बाद सर्दी से बचाव में लापरवाही बरतने पर कोल्ड डायरिया की समस्या हो सकती है। बच्चों की अच्छी देखभाल और खानपान पर ध्यान देना जरूरी है। शाम और सुबह ठंड अधिक पड रही है जो कि हार्ट के मरीजों के लिए घातक हो सकता है सर्दियों में हार्ट के मरीजों में पसीना आना कम हो जाता है। जिसके कारण शरीर में पानी की मात्रा बढ जाती है।

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डॉ. शरद वर्मा ने बताया कि कोल्ड डायरिया के सबसे ज्यादा मामले शुरुआती ठंड में होते हैं। इस दौरान बरती गई लापरवाही मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाती है और संक्रमण के चलते उल्टी-दस्त की समस्या शुरू हो जाती है। कोल्ड डायरिया सामान्य डायरिया की तरह है। इसमें पीड़ित को सर्दी, जुकाम के साथ बुखार होता है जिसके बाद बच्चे रोट्रो व नोरो वायरस की चपेट में आकर उल्टी दस्त के शिकार हो जाते हैं।

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