वेद ही धर्म का मूल: महंत नृत्य गोपाल दास

वेद ही धर्म का मूल: महंत नृत्य गोपाल दास

मानव संसाधन विकास मंत्रालय की घोषणा से रामनगरी के संत-धर्माचार्यों में खुशी की लहर


मानव संसाधन विकास मंत्रालय की घोषणा से रामनगरी के संत-धर्माचार्यों में खुशी की लहर

अयोध्या। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा वेद शिक्षा को बढ़ावा देने और वैदिक विद्वानों को हर साल पुरस्कृत करने की घोषणा का रामनगरी के संत धर्माचार्यों सहित विश्व हिन्दू परिषद ने स्वागत किया है। इस घोषणा से अयोध्या के संत-धर्माचार्यों में खुशी की लहर है।

यह भी पढ़े:- केएम शुगर मिल में बड़ा हादसा: गैस लीकेज की चपेट में आने से एक मजदूर की मौत, एक गम्भीर

श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष व मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि वेद साक्षात भगवान है, जो हिन्दू समाज का मेरूदंड भी है। वेदोखिलो धर्ममूलम् -वेद ही धर्म का मूल है। श्रवण मात्र से जिसकी ऋचाएं कल्याणकारी सिद्ध हों, ऐसे वेद का संरक्षण संवर्धन आवश्यक है।

यह भी पढ़े:- फैजाबाद में भीषण ठंड से जनजीवन अस्त-व्यस्त

महंत कमलनयन दास शास्त्री ने कहा कि वेद यानि साक्षात हमारे ईष्ट, जिनकी पूजा अर्चना करके ही हम अपने पुरातन सभ्यता संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को अक्षुण्य रखे हुए हैं। अयोध्या संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास रामायणी ने कहा कि संस्कृत शिक्षा और वैदिक विद्वानों के उत्थान का माध्यम सरकारों को बनना ही होगा। मात्र कागज पर नहीं यथार्थ पर लाना ही श्रेष्ठकर होगा।

यह भी पढ़े:- सुशासन दिवस के रूप में मना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म दिवस

विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि वेद जैसे हमारी संहिता हमारे जीवनमूल्यों की सुरक्षा करते हैं। उन्होंने कहा विहिप संरक्षक स्व. अशोक सिंहल का सदैव प्रयास रहा कि वेद की शिक्षा का विस्तार हो और इसके लिए उन्होंने देश भर में संत, धर्माचार्यों तथा सामाजिक संगठनों के संरक्षण में वेद विद्यालयों की स्थापना कराई।

यह भी पढ़े:- साकेत छात्रसंघ चुनाव: विद्यार्थी परिषद और समाजवादी छात्रसभा के प्रत्याशियों ने दिखाई ताकत


You may also like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *