चिकित्सक की एक मुस्कान बढ़ाती है रोगी की इच्छाशक्ति: राम नाईक

चिकित्सक की एक मुस्कान बढ़ाती है रोगी की इच्छाशक्ति: राम नाईक

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह सम्पन्न


किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह सम्पन्न

लखनऊ। प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि चिकित्सक को रोगी ईश्वर मानते हैं। चिकित्सक की एक मुस्कान रोगी की इच्छाशक्ति बढ़ाती है। स्वास्थ्य लाभ के लिये दवा के साथ अच्छा व्यवहार आवश्यक है। श्री नाईक शनिवार को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के 13वें दीक्षांत समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राज्यपाल ने कैलीफोर्निया के डॉ सुधीर गुप्ता एवं एम्स नई दिल्ली के प्रसिद्ध कैंसर विशेषज्ञ प्रो गौरा कृष्ण रठ को मानद उपाधि प्रदान की। साथ ही उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले चिकित्सा विद्यार्थियों को पदक एवं उपाधि भी प्रदान की।

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राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मेडिकल के छात्र अपने माता-पिता और गुरूजनों का विशेष ध्यान रखे। माता-पिता ने महंगी शिक्षा देकर उन्हें इस योग्य बनाया है इसलिए उनका ध्यान और सम्मान करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आने वाले जीवन में डिग्री प्राप्त करते समय ली गई शपथ का अवश्य ध्यान रखें। श्री नाईक ने कहा कि आज की स्पर्धा वैश्विक स्तर की है। जीवन में जो भी लक्ष्य निर्धारित किया है उसे प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत, प्रमाणिकता और पारदर्शिता से काम लें। शार्टकट स्थायी नहीं होता। अपनी असफलता का आत्मनिरीक्षण करके फिर से आगे बढऩे का प्रयत्न करें। ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ जीवन की सफलता का मूल मंत्र है। जीवन में कामयाबी के लिए निरन्तर आगे बढ़ते रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सूर्य इसलिए वंदनीय है क्योंकि वह निरन्तर चलायमान रहता है और दूसरों को ऊर्जा और प्रकाश देता है।

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राज्यपाल ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि लड़कियाँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। पूर्व में शिक्षा प्राप्त करने के बाद बेटियाँ केवल शिक्षण या नर्सिंग सेवा में योगदान करती थी। चित्र बदल रहा है, बेटियां अब प्रशासनिक, पुलिस एवं सेना आदि की सेवाओं में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना रही हैं। मुख्य अतिथि पद्म भूषण प्रो बीएन हेगड़े ने कहा कि अच्छा मनुष्य ही अच्छा चिकित्सक हो सकता है। उन्होंने कहा कि औसत पर ध्यान न रखकर उत्कृष्टता पर ध्यान केन्द्रित करें। ऐसे अनुसंधान को वरीयता दें जो रोगियों के दु:ख को दूर कर सके। अपने ज्ञान में दिनों-दिन वृद्धि करने के लिए कुछ नया करने पर विचार करें। उन्होंने कहा कि मरीज को देखकर उसकी समस्या का समाधान करने का प्रयास करें। दीक्षांत समारोह में कुलपति प्रो एमएलबी भट्ट ने स्वागत उद्बोधन के साथ-साथ विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की।

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