हंगामे के बीच विधानसभा से यूपीकोका विधेयक पारित

हंगामे के बीच विधानसभा से यूपीकोका विधेयक पारित



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लखनऊ। विधानसभा में गुरुवार को उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधयेक 2017 (यूपीकोका) पारित हो गया। इस विधेयक पर संशोधन का प्रस्ताव नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने रखा, जिसका समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस के सदस्यों ने समर्थन किया। इस विधेयक पर चर्चा के बाद विपक्ष ने विधेयक का विरोध किया और सम्पूर्ण विपक्ष सदन से बाहर चले गए। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने प्रश्न उपस्थित किया तत्पश्चात विधेयक पारित हो गया।

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सदन में नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी ने जहां इसे काला कानून बताया वहीं, चर्चा के दौरान सदन में नेता सदन के मौजूद न होने की बात पर आपत्ति दर्ज कराई कि जब ऐसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा चल रही है तो मुख्यमंत्री की सदन में मौजूदगी जरूरी है। दरअसल, नेता प्रतिपक्ष के बोलने के कुछ देर बाद ही नेता सदन योगी आदित्यनाथ ने किसी आवश्यक कार्य से जाने की अनुमति मांगी थी। सपा के वरिष्ठ नेता मो. आजम खां ने कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष बोले तो कम से कम मुख्यमंत्री को सदन में रहना ही चाहिए। चौधरी ने कहा कि इसी तरह का कानून जब 2007 में तत्कालीन मायावती सरकार द्वारा सदन में लाया गया तो उस समय भाजपा सदस्य की हैसियत से मौजूद संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना और हुकुम सिंह ने इस कानून की कड़ी मुखालफत की थी। उन्होंने कहा कि इस कानून के दोनों सदनों में पारित होने के बाद राज्यपाल और राष्ट्रपति ने नामंजूर कर दिया था।

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उन्होंने इसे तुगलकी कानून की संज्ञा देते हुए कहा कि इस कानून के जरिए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर भी अंकुश लगाने की तैयारी की गई है। उन्होंने कहा कि यूपी कोका विधेयक प्रदेश के सभी वर्गों के लिए काला कानून है इसके जरिए अघोषित इमरजेंसी लगाने की तैयारी है। उन्होंने सरकार से कहा कि इस विधेयक को वापस ले अन्यथा विधान सभा अध्यक्ष हदय नारायण दीक्षित इसे पारित न करवाएं। उन्होंने कहा कि जब सरकार का दावा है कि उसने पिछले नौ महीनें में प्रदेश की कानून व्यवस्था को सुधारने में बड़ी सफलता हासिल की है तो फिर ऐसे कानून को लाने की आवश्यकता क्या थी।

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रामगोविन्द चौधरी ने कहा कि जन प्रतिनिधि अपने क्षेत्र की जनता के बीच किसी उत्सव में जाते हैं, वहां रायफल वाले अपराधी भी रहते हैं यदि उस उत्सव में कोई जन प्रतिनिधि के साथ फोटो ले ले उसके बाद वह पुलिस अधिकारी या दरोगा को दे दे तो दरोगा उस जनप्रतिनिधि को संगठित गिरोह के अपराधियों को संरक्षण देने के लिए पेश कर सकता है और नेता जेल जा सकता है। इसी प्रकार पत्रकार कोई रिपोर्ट लिखता है तो पुलिस अधिकारी चाह जाए तो उसे संगठित अपराधियों से सम्बन्ध होने के आरोप में यूपी कोका में जेल में डाल सकता है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया में फांसी खत्म करने की बात चल रही है और लोग आंदोलन चला रहे हैं। वहीं सरकार ने फांसी का प्राविधान किया है।

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बसपा के नेता लाल जी वर्मा ने कहा कि इस विधेयक का दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों तथा कमजोर वर्ग का शोषण होगा और वह ही लोग जेल जाएगें। उन्होंने कहा कि गैगस्टर एक्ट और गुंडा टैक्स पहले आए उसके बाद भी अपराधों में कमी नही आई। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले राजनीतिज्ञ भी जेल जाएंगे और इस कानून की धारा के तहत जेल में सड़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में पुलिस और नौकरशाहों को खुली छूट दी गई है। वह अपने राजनीतिक विरोधियों को इस विधेयक से निशाना बनाएंगे। यह जनविरोधी काला कानून है इसलिए संशोधन का वह समर्थन करते हुए यह विधेयक वापस लेने की मांग करते हैं। कांग्रेस के नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा कि इस विधेयक से पत्रकारों को अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं होगी। पुलिस राजनैतिक विरोधियों पर अंकुश लगाने के लिए इस कानून का दुरूपयोग करेगी।

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सूचना राज्य मंत्री नीलकंठ तिवारी ने कहा कि पहले नकबजनी आदि के ही अपराध होते थे अब दूसरे राज्यां में रहे माफिया अपने गुर्गो के जरिये मकान कब्जियाते हैं या जमीन अपने नाम कराते हैं। बहुत से अपराधी ठेकेदारों से वसूली करते हैं और फुटकर व्यापारियों से चौथ वसूलते हैं, इससे उनके कारनामों पर रोक लग सकेगी और वह सीखचां के पीछे हांगे। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि विधेयक में यह प्राविधान किया गया है जिसमें कोई भी व्यक्ति इसका दुरूपयोग नहीं कर सकेगा। राजनैतिक लोगों पर यह कानून नहीं लगेगा। संसदीय कार्य मंत्री के जवाब से असंतुष्ट सम्पूर्ण विपक्ष ने सदन से वाक आउट कर दिया और यह विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गया।

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