अब लखनऊ में होगा वक्फ अधिकरण, कैबिनेट की मंजूरी

अब लखनऊ में होगा वक्फ अधिकरण, कैबिनेट की मंजूरी



लखनऊ। प्रदेश विधानमंडल के शीतकालीन सत्र शुरू होने के एक दिन पहले बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक हुई। लोक भवन में हुई कैबिनेट की बैठक में 16 निर्णयों को मंजूरी दे दी गई।

सरकार के प्रवक्ता और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पत्रकार वार्ता में बताया कि उत्तर प्रदेश वक्फ अधिकरण नियमावली-2017 के प्रख्यापन का निर्णय को मंजूरी दी गई है। अब वक्फ अधिकरण रामपुर की जगह अब लखनऊ में होगा। उन्होंने बताया कि वक्फ संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए वक्फ अधिकरण नियमावली में संशोधन किया गया है। इसमें एक अध्यक्ष व दो सदस्य होंगे। इसके अलावा प्रत्येक जिले में इसकी व्यवस्था होगी। इसके साथ 3 मार्च 2014 के बाद के सभी फैसलों की सुनवाई प्रस्तावित अधिकरण में होगी।

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यूपी कोका विधेयक के मसौदे को मंजूरी

उन्होंने बताया कि संगठित अपराध पर रोक लगाने के लिए ‘उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक-2017’ के यूपी कोका विधेयक के मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी मिली है।  ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय का गठन किया जाएगा। यूपी कोका के मामलों में पहले कमिश्नर और आईजी जांच करेंगे ताकि इस कानून का गलत इस्तेमाल न हो। उन्होंने कहा कि इससे संगठित अपराधियों, भू-माफियाओं, शराब माफियाओं, खनन माफियाओं और सफेदपोश अपराधियों की गैर-कानूनी गतिविधियों पर अंकुश लगेगा। विधेयक विधानसभा के शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत होगा।

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राज्य स्तरीय संगठित अपराध नियंत्रण प्राधिकरण बनेगा

सरकार के प्रवक्ताओं ने बताया कि संगठित अपराधों से अर्जित अपराधियों की संपत्ति को मामलों की विवेचना के दौरान ही संबंधित न्यायालय की अनुमति से राज्य सरकार द्वारा जब्त किया जाएगा। आपराधिक तत्व किसी सूरत में अपनी गैर-कानूनी संपत्ति का लाभ नहीं उठा पाएंगे। संगठित अपराध में लिप्त गिरोहों पर नियंत्रण व निगरानी के लिए प्रमुख सचिव गृह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय ’संगठित अपराध नियंत्रण प्राधिकरण’ बनेगा। प्राधिकरण स्वत: या प्राप्त होने वाली शिकायतों की जांच करेगा। इसी तर्ज पर जिलों में ’जिला संगठित अपराध नियंत्रण प्राधिकरण’ बनेंगे। उन्होंने कहा कि ’संगठित अपराध नियंत्रण प्राधिकरण’ के आदेशों के विरुद्ध अपील की व्यवस्था भी होगी। इसके लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में अपीलीय प्राधिकरण का गठन किया जाएगा।

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बायोमेट्रिक अटेंडेंस प्रणाली को लागू करने की मंजूरी

ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि शासकीय कार्यों का पूरी निष्ठा से संपादन सुनिश्चित हो इसके लिए उत्तर प्रदेश सचिवालय में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक और आधार आधारित अटेंडेंस प्रणाली को लागू करने की मंजूरी दी गई है। अब बॉयोमेट्रिक अटेंडेंस का इस्तेमाल सचिवालय के सभी अधिकरियों-कर्मचारियों के लिए अनिवार्य होगा।

कैबिनेट के अन्य अहम फैसले

  • उप्र राजस्व संहिता, 2006 में वर्णित तहसील स्तरीय समेकित गांव निधि के गठन का गठन लिया गया है।
  • पेराई सत्र 2012-13 में चीनी मिलों को गन्ना क्रयकर में एक वर्ष की दी गई छूट के संबंध में आ रही विसंगतियों के निराकरण संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
  • यूपी खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव पर मुहर लगी है।
  • यूपी सूचना प्रद्यौगिकी और स्टार्ट अप नीति के अंतर्गत सब्सिडी देने संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी।
  • किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) लखनऊ में ऑर्गन ट्रांसप्लान्ट यूनिट की स्थापना में उच्च विशिष्टियों के उपयोग को मंजूरी।
  • इलाहाबाद में हाईकोर्ट के जज व कर्मचारियों के लिए ग्राम देवघाट छालवा में न्याय ग्राम योजना शुरू करने का फैसला किया गया है। इसके निर्माण पर 395 को रुपए खर्च किए जाएंगे।
  • उप्र चावल निर्यात प्रोत्साहन योजना (2017-2022) को आगामी 05 वर्षों के लिए लागू करने का निर्णय लिया गया है।
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत वर्मी कंपोस्ट यूनिट के निर्माण का निर्णय लिया गया है।
  • स्टाम्प विभाग में स्टाम्प नियोजन को लेकर आए प्रस्ताव को मंजूरी मिली हैं।
  • यूपी औद्योगिक निवेश और प्रोत्साहन नीति को मंजूरी दी गई है। उन्होंने बताया कि लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने की नीति बनेगी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग को मंजूरी दी गई है।
  • उ.प्र. जूनियर हाईस्कूल (अध्यापकों एवं अन्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान) (संशोधन) अध्यादेश, 2017 के प्रतिस्थानी विधेयक को राज्य विधान मण्डल के आगामी सत्र में पुर:स्थापित/पारित कराकर अधिनियमित करने का निर्णय लिया गया है।
  • उप्र बेसिक शिक्षा (संशोधन) अध्यादेश, 2017 के प्रतिस्थानी विधेयक को राज्य विधान मण्डल के आगामी सत्र में पुर:स्थापित/पारित कराकर अधिनियमित करने का निर्णय भी किया गया है।

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