लविवि में समाजशास्त्रीय सम्मेलन नौ नवम्बर से, जानें पूरा कार्यक्रम

लविवि में समाजशास्त्रीय सम्मेलन नौ नवम्बर से, जानें पूरा कार्यक्रम



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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष एवं समन्वयक प्रो. डी. आर. साहू ने बताया कि 43वें अखित भारतीय समाजशास्त्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ नौ नवम्बर को शाम साढ़े छह बजे से शिवाजी क्रीडांगन में होगा, जिसके मुख्य अतिथि नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार होंगे। इसी दौरान अशोका विवि के कुलपति डॉ. भानु प्रताप मेहता कार्यक्रम के केंद्रीय विषय और महत्ता पर अपना सम्बोधन देंगे। समारोह के अंत में ख्यातिलब्ध समाजशास्त्री प्रो. रत्ना नायडू और प्रो. नन्दू राम को उनके योगदान के लिए लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।

दस नवम्बर का कार्यक्रम इस प्रकार

प्रो. डी. आर. साहू ने बताया इसी सत्र के अगले दिन दस नवम्बर को सुबह नौ से साढ़े दस बजे तक शोध समितियों का आयोजन ओएनजीसी भवन में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सुबह 11 बजे से शिवाजी स्टेडियम में ‘वर्तमान समय में नगरीय अध्ययन पर पुर्नविचार’ विषय अध्यक्षीय भाषण प्रो. सुजाता पटेल द्वारा पर दिया जाएगा, जिसमें वर्तमान समय में नगरीय जीवन में होने वाले प्रभावों और कारणों साथ-साथ आधुनिक जीवन शैली में होने वाले परिवर्तनों को रेखांकित करने का प्रयास किया जाएगा।

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इसके बाद 12 बजे से भारत में नगरीय रूपांतरण विषय पर चर्चा आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता हैदराबाद विश्वविद्यालय के समाशास्त्र विभाग की प्रो. रत्ना नायडू करेंगी। इस दौरान भूमंडलीकारण, भारतीय नगर और नगरवाद के विकास परिवर्तनों के साथ उसके दुष्प्रभाव पर चर्चा होगी। इस दौरान करोल उपाध्याय (एडवांस स्टडी, बंगलुरू), पुरेंद्र प्रसाद (समाजशास्त्र विभाग हैदराबाद विवि), डी. पार्थ सारथी (आईआईटी मुम्बई) समसामयिक घटनाओं के संदर्भ में अपने विचार भी रखेंगे।

द्वितीय सत्र का आयोजन शाम सवा चार से किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता प्रो. वीनादास (जान हॉपकिंन्स यूनिवर्सिटी) करेंगी। इस दौरान ‘मध्यम वर्ग और उसकी आकांक्षाएं’ विषय पर चर्चा होगी, जिसमें खास तौ पर मुस्लिम मध्यम वर्ग की संरचना, पहचान, गतिशीलता और बाजार विकास के नए आयामों पर प्रकाश डाला जाएगा। इसके अलावा ‘भारत के स्थानिक वर्ग, नई नगरीय चुनौतियां’ विषय पर तनवीर फजल (जेएनयू नई दिल्ली), असीम प्रकाश (टीआईएसएस हैदराबाद), संजय श्रीवास्तव (नई दिल्ली) अपने विचार रखेंगे। इसके बाद शाम सात से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अयोजन किया जाएगा, जिसमें कथक, स्थानीय कला संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।

11 नवम्बर का कार्यक्रम इस प्रकार

11 नवम्बर को सुबह 11 बजे से राधा कमल मुखर्जी व्याख्यान होगा। इस सत्र में ‘भारत में टी.बी.’ विषय पर प्रो. वीना दास (जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी) व्याख्यान देंगी। वह भारत में टी.बी. से होने वाली मौतों, उसके कारणों और उपायों पर सैद्धान्तिक और व्यवहारिक पहलुओं पर चर्चा करेंगी।

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इसके अलावा ‘शक्ति, प्रभुत्व और वर्चस्व की संस्कृतियों’ पर विमर्श होगा। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. नंदूराम (जो कि एक सुप्रसिद्ध समाज वैज्ञानिक हैं) करेंगे। इस दौरान ‘वर्चस्व के नए आयाम’ पर मैत्रेयी चौधरी (जेएनयू, नई दिल्ली), ग्रमीण अभिजन और नव उदारवादी आर्थिक रूपांतरण पर शोनाल्डे देशाई (मेरी लैंड कॉलेज पार्क अमेरिका), मध्यम वर्ग और लिंग विभेदन पर केएस जेम्स (जेएनयू, नई दिल्ली) अपने विचार रखेंगे।

इसके बाद मालवीय हाल में शाम सवा चार बजे जनरलवाड़ी मीटिंग का अयोजन किया जाएगा और शाम सात बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम और आठ बजे रात्रिभोज होगा।

12 नवम्बर का कार्यक्रम इस प्रकार

कार्यक्रम के अंतिम दिन यानि 12 नवम्बर को सुबह नौ बजे चौथा सत्र शुरू होगा, जिसकी अध्यक्षता लविवि के पूर्व कुलपति जीबी पटनायक करेंगे। इस दौरान ‘उत्तर प्रदेश की वर्तमान स्थितियों में हो रहे बदलाव और परिवर्तन’ पर चर्चा होगी, जिसमें समाज शास्त्र विभाग के योगदान और उत्तर प्रदेश के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्यों पर नव उदारवाद, भूमंडलीकरण, लोकतंत्रीकरण की प्रक्रिया के पहलुओं पर विस्तृत प्रकाश डाला जाएगा। इसके अलावा नवउदारवाद दौर में उत्तर प्रदेश में उपभोग, वृद्धि और विवरण के आयामों पर रवि एस श्रीवास्तव (जेएनयू नई दिल्ली), निम्न जातियों में राजनीतिक चरों में परिवर्तन और सामाजिक न्याय की नई आकांक्षायें विषय पर सुधा पई (जेएनयू) और दलितों पर नव उदारवाद के प्रभावों, जिसमें वह नवसीमांत समूहों में परिणत हुए हैं विषय पर बद्री नारायण (जीवी पंत सोशल सांइस इलाहाबाद) अपने विचार रखेंगे।

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प्रो. साहू ने बताया कि कार्यक्रम के अंत में सभी शोध समितियों में प्रस्तुत शोध पत्रों का सार प्रस्तुत किया जाएगा। सुबह 10.45 बजे शिवाजी स्टेडियम में प्रमाणपत्रों का वितरण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत एवं विदेशों से मिलाकर लगभग एक हजार डेलीगेट इस कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। इस बृहद आयोजन में सभी महाविद्यालयों के समाजशास्त्र विभागों की सक्रिय सहभागिता है। कार्यक्रम में लखनऊ विवि के मुखिया से लेकर सभी विभागों द्वारा सक्रिय सहयोग किया जा रहा है, जिसके परिणाम में यह अयोजन सम्भव हो पा रहा है।


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