रैन बसेरा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, केंद्र सरकार क्यों नाले में बहा रही पैसा, खत्म कर देनी चाहिए योजना?

रैन बसेरा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, केंद्र सरकार क्यों नाले में बहा रही पैसा, खत्म कर देनी चाहिए योजना?



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नई दिल्ली। गरीबों को मकान देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और केंद्र सरकार को जमकर लताड़ लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि नाइट शेल्टरों (रैन बसेरा) को लेकर योजना खत्म क्यों नहीं कर देते? सरकार पैसे को क्यों नाले में बहा रही है? 1000 करोड़ की भारी रकम को किसी और काम में खर्च करें? हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पर गम्भीरता से विचार करें। ये टैक्सपेयर के पैसे का दुरुपयोग है।

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रैन बसेरों में निर्माण की स्थिति क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 1.80 हजार लोग बेघर हैं और सरकार ने सिर्फ छह हजार लोगों के लिए व्यवस्था की है। बाकी 1.74 लाख लोग कैसे गुजर-बसर कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा कि रैन बसेरों में निर्माण की स्थिति क्या है? कितना पैसा लग रहा है? कितने बनवाए गए हैं?

रैन बसेरा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, केंद्र सरकार क्यों नाले में बहा रही पैसा, खत्म कर देनी चाहिए योजना?

तीन सालों में कुछ नहीं किया: सुप्रीम कोर्ट

यही नहीं हरियाणा सरकार को भी कोर्ट ने खरी खोटी सुनाई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछले तीन सालों में आपने मकानों को को लेकर कुछ नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि 2014 अक्टूबर में जो हलफनामा आपने दायर किया था, उसके मुताबिक हरियाणा में 6107 शेल्टर थे, आपने अभी जो हलफनामा दायर किया है उसमें अभी भी 6107 शेल्टर हैं। इसका मतलब ये है कि आपने पिछले तीन सालों में कुछ नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा आपने तीन सालों में क्या किया है।

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शहरी मकान बनाने का कब शुरू होगा काम

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ हलफनामे में ये कहने से कि हम काम कर रहे हैं, इससे काम नहीं चलेगा। अगर सरकार गम्भीर है और उसे काम पर गर्व है तो बताए कि क्या काम किया है। सरकारें कहती हैं कि नए शहरी मकान बनाएंगे ये कब शुरू होगा। कितना पैसा, कितना वक्त लगेगा, क्या सुविधाएं होंगी।

सरकार को नहीं है गरीबों की चिंता

कोर्ट ने यह भी कहा कि ये वो लोग नहीं हैं, जो अपनी इच्छा से गरीब हैं, घर नहीं चाहते, सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए। ठंड की शुरुआत हो रही है, लोगों को जरूरत है, लेकिन सरकार को ये नहीं पता कि कितने लोग शेल्टरों में रह रहे हैं? उनके लिए खाना कहां से आ रहा है, क्या वो भीख मांगकर खाते हैं, क्या उनके सोने की व्यवस्था है या नाइट शेल्टर  (रैन बसेरा) के फर्श पर सो रहे हैं?

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