रिपोर्ट: नोटबंदी के बाद भी कालेधन का नहीं हो सका सफाया

रिपोर्ट: नोटबंदी के बाद भी कालेधन का नहीं हो सका सफाया



नई दिल्ली। नोटबंदी के एक पूरे होने पर मोदी सरकार को तगड़ा झटका देने वाली एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि नोटबंदी से कालेधन का पूरी तरह से सफाया नहीं हुआ है और न ही आतंकी गतिविधियों पर इसका कोई असर पड़ा है। यह दावा देश के तैंतीस गैर सरकारी संगठनों द्वारा किए गए सर्वेक्षण में किया गया है।

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पिछले वर्ष आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी। एक साल बाद देश की अर्थव्यस्था पर पड़े प्रभावों का अध्ययन करने वाली सर्वेक्षण की रिपोर्ट को जारी किया गया है। सामाजिक संगठन अनहद के नेतृत्व में देश के 21 राज्यों में 3647 लोगों के सर्वेक्षण के दौरान नोटबंदी से जुड़े 96 प्रश्न पूछे गए थे। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता जान दयाल, गौहर राजा, सुबोध मोहंती और शबनम हाशमी ने मंगलवार को रिपोर्ट जारी की।

सर्वेक्षण के आंकड़े इस प्रकार

  • केवल 26.6 प्रतिशत लोगों ने माना कि नोटबंदी से काले धन का सफाया हुआ है, जबकि 55.4 प्रतिशत लोग मानते हैं कि कालाधन नहीं पकड़ा गया, जबकि 17.5 प्रतिशत लोगों ने इस पर जवाब नहीं दिया।
  • केवल 26.3 प्रतिशत ने माना कि नोटबंदी से आतंकवाद खत्म हो जाएगा, जबकि 25.3 प्रतिशत ने कोई जवाब नहीं दिया।
  • 33.2 प्रतिशत ने माना कि नोटबंदी से घुसपैठ कम हुई, जबकि 45.4 ने माना कि घुसपैठ कम नहीं हुई। वहीं, 22 प्रतिशत लोगों ने कोई जवाब नहीं दिया।
  • 48.6 प्रतिशत लोगों का कहना है कि कैशलेस समाज बनाने का झांसा देने के लिए नोटबंदी की गई, जबकि 34.2 प्रतिशत लोगों ने कहा कि नकदी रहित अर्थव्यस्था अच्छी बात है और सरकार ने इस दिशा में कदम उठाया है, जबकि केवल 17 प्रतिशत लोगों ने माना कि अर्थव्यस्था को नकदी रहित बनाने के लिए ही नोटबंदी की गई।
  • 6.7 प्रतिशत लोगों का कहना है कि नोटबंदी से आम जनता को फायदा हुआ, जबकि 60 प्रतिशत लोगों ने माना कि इस से कारपोरेट जगत को लाभ हुआ। 26.7 प्रतिशत की नजर में नोटबंदी से सरकार को फायदा हुआ।
  • 65 प्रतिशत लोगों ने माना कि नोटबंदी के दौरान अमीर लोग बैंक की लाइन में नहीं लगे, जबकि नोटबंदी से 50 प्रतिशत लोगों का भरोसा सरकार से खत्म हो गया।

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