भारतीय समाज के विकास में लविवि के समाजशास्त्र विभाग का अग्रणी योगदान : प्रो. साहू

भारतीय समाज के विकास में लविवि के समाजशास्त्र विभाग का अग्रणी योगदान : प्रो. साहू



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लखनऊ। करीब पांच दशक बाद एक बार फिर  लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में नौ नवम्बर से अखिल भारतीय समाजशस्त्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। जिसके मुख्य अतिथि नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार होंगे।

लखनऊ विश्वविद्यालय समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष एवं समन्वयक प्रो. डी. आर. साहू ने बताया कि भारतीय समाज के उदय और विकास में लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग का अग्रणी योगदान है। उन्होंने बताया कि भारत के दो विश्वविद्यालयों (मुम्बई विश्वविद्यालय व लखनऊ विश्वविद्यालय) में पठन-पाठन भारत में सबसे पहले प्रारम्भ हुआ और इन्हीं दोनों विश्वविद्यालयों में समाजशास्त्र के व्यावसायिक संगठनों का निर्माण भी हुआ।

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उन्होंने बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्बन्धित समाजशास्त्रीय चिंतकों ने एक अखिल भारतीय सम्मेलन की स्थापना की, जिसकी सभाएं विभिन्न विश्वविद्यालयों में आयोजित की जाती रही, जिनमें समाजशास्त्रीय शोध प्रपत्रों पर अखिल भारतीय विचार-विमर्श की परम्परा पड़ी। उन्होंने बताया कि लगभग पांच दशक पूर्व लखनऊ विश्वविद्यालय में समाजशास्त्रियों का अखिल भारतीय सम्मेलन आहूत किया था। उसके पश्चात् प्रथम बार फिर से समाजशास्त्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।

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अखित भारतीय समाजशास्त्रीय सम्मेलन 9 नवम्बर से

प्रो. साहू ने बताया कि 43वें अखित भारतीय समाजशास्त्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ 9 नवम्बर 2017 को सायं साढ़े छह बजे से शिवाजी क्रीडांगन में होगा, जिसके मुख्य अतिथि नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार होंगे। वहीं, समारोह में विषय प्रवर्तन अशोका विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रताप भानु मेहता होंगे। इसके अलावा समारोह में ख्यातिलब्ध समाजशास्त्री प्रो. रत्ना नायडू और प्रो. नन्दू राम को उनके योगदान के लिए लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।

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गौरतलब है कि समाजशास्त्र विभाग इस देश का अत्यंत पुराना विभाग है, जिसका इतिहास 1922 से शुरू होता है। समाजशास्त्र विभाग प्रो. राधाकमल मुखर्जी, प्रो. डीपी मुखर्जी, प्रो. डीएन मजूमदार और प्रो. एके सरन जैसे कई निष्ठावान लोगों के नेतृत्व से अलंकृत रहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय ने प्रो. योगेन्द्र सिंह, प्रो. टीएन मदन, प्रो. केएन शर्मा, प्रो. बीआर चौहान समेत तमाम प्रख्यात समाजशास्त्रियों को भी जन्म दिया है। समाज शास्त्र विभाग विभिन्न शोध परियोजनाओं तथा सलाहकारी सेवाओं में भी सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रहा है। साथ ही भारतीय समाजशास्त्रीय परिषद की शासी निकाय तथा कई अन्य राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय शैक्षिक निकायों में भी समाजशास्त्र विभाग के विभिन्न अध्यापक प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि समाजशास्त्रीय शोध से जुड़े क्षेत्रों ( परम्परा, आधुनिकता, पर्यावरण, वैश्वीकरण, लिंग, प्रवास और सामाजिक आंदोलन) में सक्रिय रूप से विभाग जुड़ा रहा है। बता दें कि यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने समाजशास्त्र विभाग को 10 वर्ष (1992 से 2002 तक) की अवधि के लिए विशेष अनुदान का विभाग (डीएसए) का दर्जा दिया गया।

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