आईएएस सदाकांत पर भ्रष्टाचार के आरोप में केन्द्र सरकार पर नरमी बरतने का आरोप

आईएएस सदाकांत पर भ्रष्टाचार के आरोप में केन्द्र सरकार पर नरमी बरतने का आरोप

संजय ने बताया सदाकांत पर साल 2011 में निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए भारत और चीन की संवेदनशील सीमा पर सडक़ निर्माण में जासूसी करने का आरोप लगने के बाद सीबीआई ने सदाकांत के दिल्ली आवास पर छापा मारकर तलाशी ली थी


संजय ने बताया सदाकांत पर साल 2011 में निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए भारत और चीन की संवेदनशील सीमा पर सडक़ निर्माण में जासूसी करने का आरोप लगने के बाद सीबीआई ने सदाकांत के दिल्ली आवास पर छापा मारकर तलाशी ली थी

लखनऊ। केंद्र की मोदी सरकार भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के दावों पर लखनऊ के एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने भ्रष्टाचार पर नरमी बरतने के आरोप लगाए हैं। एक आरटीआई के जबाब में भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के अवर सचिव और केंद्रीय जन सूचना अधिकारी राज किशन बत्स ने बताया है कि मोदी सरकार ने यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी सदाकांत शुक्ल द्वारा साल 2011 में केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव के पद पर रहते हुए किए गए 200 करोड़ के भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर पर सदाकांत शुक्ल के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है।

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आरटीआई कार्यकर्ता संजय शर्मा ने बताया कि उन्होंने यह आरटीआई बीते जुलाई की 25 तारीख  को दायर की थी, जिसके जबाब में उन्हें बताया गया है कि बीते सितम्बर की 18 तारीख को भारत सरकार के सक्षम प्राधिकारी ने सदाकांत शुक्ला के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी के प्रस्ताव को इंकार कर दिया है। संजय ने बताया कि उन्होंने सदाकांत शुक्ला के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी के प्रस्ताव पर निर्णय लेने के सम्बन्ध में जारी आदेश, नोटशीट्स और टिप्पणियों की भी मांग की थी पर सीपीआईओ बत्स ने कहा है कि यह सूचना देने पर अपराधियों के अन्वेषण, पकड़े जाने या अभियोजन की क्रिया में अड़चन पड़ेगी और आरटीआई एक्ट की धारा 8(1) के तहत ये सूचना देने से इंकार कर दिया है।

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संजय ने बताया सदाकांत पर साल 2011 में निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए भारत और चीन की संवेदनशील सीमा पर सडक़ निर्माण में जासूसी करने का आरोप लगने के बाद सीबीआई ने सदाकांत के दिल्ली आवास पर छापा मारकर तलाशी ली थी। सीबाईआई ने एफआईआर दर्ज कर साल 2012 में सदाकांत के खिलाफ अभियोजन चलाने की अनुमति भी मांगी थी। केंद्र की तत्कालीन सरकार ने सदाकांत को पद से हटाकर सीबीआई को भी उनसे पूछताछ की इजाजत देते हुए सदाकांत को प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी होने से पहले ही पैरेंट कैडर वापस भेज दिया था। इसके बाद पांच साल बीत जाने के बाद भी सदाकांत के भ्रष्टाचार के इस मामले में अभियोजन स्वीकृति तक न देने के आधार पर संजय ने मोदी सरकार को भ्रष्टाचार के मामले को उच्च न्यायालय ले जाने की बात कही है।

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