टीईटी परीक्षा में नकल का ठेका लेने वाले दो माफिया गिरफ्तार, सरगना समेत दो फरार

टीईटी परीक्षा में नकल का ठेका लेने वाले दो माफिया गिरफ्तार, सरगना समेत दो फरार

5 अक्टूबर को कई जनपदों में होने वाली टीईटी की आफ लाइन भर्ती परीक्षा-2017 में नकल माफिया के सक्रिय होने की सूचना मिली थी


5 अक्टूबर को कई जनपदों में होने वाली टीईटी की आफ लाइन भर्ती परीक्षा-2017 में नकल माफिया के सक्रिय होने की सूचना मिली थी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बड़ी कामायाबी हासिल की है। एसटीएफ ने इलाहाबाद पुलिस के साथ अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में इलेक्ट्रानिक डिवाइस का इस्तेमाल कर फर्जीवाड़ा करने वाले नकल माफिया गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इलाहाबाद के जार्जटाउन इलाके से पकड़े गए में दोनों नकलबाजों के दो साथी मौके से भागने में सफल रहे। जिनकी तलाश में टीम जुटी है।

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यूपी एसटीएफ के एडिशनल एसपी त्रिवेणी सिंह आज बताया कि कई दिनों से 15 अक्टूबर को कई जनपदों में होने वाली टीईटी की आफ लाइन भर्ती परीक्षा-2017 में नकल माफिया के सक्रिय होने की सूचना मिली थी। जिन्हें पकड़ने के लिए एसटीएफ सक्रिय हुई। इस बीच सर्विलांस और मुखबिर से खबर मिली कि नकल माफिया इलाहाबाद में सक्रिय है। जिस पर शुक्रवार को टीम ने जार्जटाउन थाना क्षेत्र में दबिश दी और इलाहाबाद पुलिस की मद्द से गिरोह के दो सदस्यों संदीप पटेल पुत्र ओमकार नाथ और शिव जी पटेल पुत्र राम अभिलाष पटेल निवासीगण थाना-मऊ आइमा, इलाहाबाद को  हासिमपुर चौराहे से गिरफ्तार कर लिया। जिनके पास से 3 मोबाइल, 31 इलेक्ट्रनिक डिवाइस, 25 स्टीकर, 28 ब्लूटूथ डिवाइस, 7 सिम कार्ड और 9670 रुपये बरामद हुए है। हालांकि मौके से दो सदस्य फरार हो गए।

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एएसपी ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि फरार सदस्यों में गिरोह का सरगना सुरेंद्र पाल और केएल पटेल हैं। वांछित केएल पटेल व्यापम घोटाले में भी जेल जा चुका है। जमानत पर छूटने के बाद वह ऑनलाइन और ऑफलाइन परीक्षा में नकल करवाता है। उन आरोपियों के पकड़े जाने के बाद ही पता चल पाएगा कि प्रदेश के किस परीक्षा केन्द्र में उनकी सेटिंग थी। जहां से पेपर आउट कराकर वह सॉल्वर की मदद से नकल कराते थे। गिरफ्तार आरोपियों ने नकल कराने के लिए दो-दो लाख का लोगों से ठेका लिया था।

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एएसपी ने बताया कि नकल माफियाओं ने दिल्ली से बगिंग डिवाइस मंगाई थी जिसकी मदद से वे नकल कराते। परीक्षा केन्द्र में जाने वाले अभ्यर्थी को एक ब्लूटूथ डिवाइस और एक बगिंग डिवाइस दी जाती। ब्लूटूथ डिवाइस इतना छोटा है कि उसे कान के अंदर लगा देते। इसके बाद बगिंग डिवाइस जो एक क्रेडिट कार्ड जैसा है, जिसमें मोबाइल सिम लगा है, उसको अभ्यर्थी पर्स में रख लेते। जैसे ही नकल माफियां को किसी केन्द्र से पेपर मिलता, उसको बाहर सॉल्वर से सॉल्व कराते और कॉल करके हर अभ्यार्थी को जवाब बता देते थे।

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