कुपोषण मुक्त गांव बनाने के लिए 12 मानक निर्धारित, शासनादेश जारी

कुपोषण मुक्त गांव बनाने के लिए 12 मानक निर्धारित, शासनादेश जारी



लखनऊ। प्रदेश सरकार ने सूबे के गांवों को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए 12 आवश्यक मानक निर्धारित किये हैं। गुरुवार को इसके लिए शासनादेश जारी कर दिये गये हैं। शासनादेश में मातृ-शिशु मृत्युदर एवं मातृ-बाल कुपोषण में कमी लाते हुए कुपोषण मुक्त गांव बनाने की बात कही गयी है।

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कुपोषण मुक्त गांव के लिए निर्धारित किए गए 12 मानकों में स्वास्थ्य, आईसीडीएस, पंचायती राज, बेसिक शिक्षा एवं ग्राम्य विकास विभागों के साथ खाद्य विभाग का भी एक मानक आवश्यक मानकों की सूची में सम्मिलित किया गया है। आईसीडीएस विभाग के अंतर्गत हाट कुक्ड मील योजना के स्थान पर गृह भ्रमण को एक आवश्यक मानक निर्धारित करते हुए आईसीडीएस एवं पंचायतीराज विभाग की स्कोरिंग में आंशिक परिवर्तन किया गया है। इन 12 आवश्यक मानकों के अतरिक्त दो मुख्य एवं अनिवार्य मानक निर्धारित किए गए हैं।

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मुख्य एवं अनविर्य मानक के अंतर्गत कुपोषण मुक्त गांव में प्रथम मानक के अनुसार 75 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं आयरन, फोलिक एसिड की निर्धारित मात्रा का सेवन करें। इससे गर्भावस्था के आखिरी त्रैमास में किसी भी गांव में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की व्यापकता 25 प्रतिशत से कम हो, जबकि दूसरे मानक के अनुसार उस गांव में छह माह से पांच वर्ष तक का कोई बच्चा डब्लूएचओ ग्रोथचार्ट के अनुसार लाल श्रेणी में न हो। शासनादेश में यह भी निर्धारित किया गया है कि वही गांव कुपोषण मुक्त कहे जाएंगे जो दोनो अनिवार्य तथा आवश्यक मानकों में 75/100 का सूचकांक प्राप्त करेंगे।

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शासनादेश में कहा गया कि सम्बन्धित जनपदीय अधिकारी द्वारा गोद लिए गए गांव में ग्राम एवं ब्लॉक स्तर पर अपेक्षित सहयोग प्राप्त करते हुए एक बेसलाइन प्रारूप बनाया जा रहा है। इस प्रारूप पर सूचना का अंकन करते हुए बेसलाइन की सूचना राज्य पोषण मिशन की वेबसाइट पर फीड की जाएगी। इसी प्रारूप पर प्रतयेक माह सम्बन्धित अधिकारियों द्वारा गांव के भ्रमण के आधार पर कुपोषण मुक्त गांव बनाने की प्रगति की सूचना भी अंकित की जाएगी और इस वेबसाइट पर फीड की जाएगी।

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मंडलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों द्वारा मण्डलीय एवं जिला पोषण समिति की मासिक बैठकों में इस वेबसाइट पर उपलब्ध सूचना के आधार पर कुपोषण मुक्त गांव बनने की प्रगति की नियमित रूप से समीक्षा की जाएगी।

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