बच्चों का बचपन सुरक्षित करना सभी की नैतिक जिम्मेदारी: कैलाश सत्यार्थी

बच्चों का बचपन सुरक्षित करना सभी की नैतिक जिम्मेदारी: कैलाश सत्यार्थी

कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि अपने अधिकारों से वंचित हर बच्चा किसी धर्म या अमीर-गरीब का नहीं, बल्कि देश की माटी का है। भेदभाव छोड़ हमें बच्चों का बचपन सुरक्षित करना होगा।


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कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि अपने अधिकारों से वंचित हर बच्चा किसी धर्म या अमीर-गरीब का नहीं, बल्कि देश की माटी का है। भेदभाव छोड़ हमें बच्चों का बचपन सुरक्षित करना होगा।

kailas satyarthi
कृषक समाज इंटर कॉलेज में सम्बोधित करते हुए कैलाश सत्यार्थी

गोला गोकर्णनाथ, खीरी। शिक्षा और सुरक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है। समाज में बाल यौन शोषण, तस्करी और दुव्र्यवहार महामारी की तरह दबे पांव घुस रही है। इससे पीडि़त बच्चों के सिसकते बचपन को महसूस कर उन्हें न्याय दिलाने के लिए सभी को जाति धर्म छोडक़र एक साथ आगे आना होगा। यह बात नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कृषक समाज इंटर कॉलेज में सम्बोधित करते हुए कहीं।

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भेदभाव छोड़ हमें बच्चों का बचपन सुरक्षित करना होगा

कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि अपने अधिकारों से वंचित हर बच्चा किसी धर्म या अमीर-गरीब का नहीं, बल्कि देश की माटी का है। भेदभाव छोड़ हमें बच्चों का बचपन सुरक्षित करना होगा। भारत समाज सुधारकों, जगतगुरुओं का देश है। इसकी गरिमा बचाने के लिए ‘भारत यात्रा’ में शामिल होकर ऐसा माहौल बनाना होगा ताकि गलत कार्य करने वालों के अंदर भय पैदा हो, तभी हमारा भारत सुरक्षित होगा।

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कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि बाल यौन शोषण के खिलाफ उनकी भारत यात्रा विश्व की पहली सांस्कृतिक और सामाजिक क्रांति है।  उन्होंने बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए पॉक्सो कानून को कमजोर बताया। कहा कि गत दिनों देश में बाल यौन शोषण के 15 हजार मुकदमों में से मात्र चार फीसदी मामलों में ही सजा हुई है। लंबित प्रकरणों की सुनवाई के लिए वह समूचे विश्व स्तर पर एक सख्त कानून बनाने के लिए अभियान चला रहे हैं और देश के हर जिला मुख्यालय पर बाल यौन शोषण और बाल दासता के प्रकरणों के निराकरण के लिए एक विशेष अदालत बनाने की मांग कर रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि उनकी इस यात्रा को सभी सामाजिक, धार्मिक, शैक्षिक, औद्योगिक, मजदूर संगठनों और राजनीतिक दलों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक की यात्राओं में साढ़े सात लाख लोगों ने भाग लेकर बाल यौन शोषण रोकने का समर्थन किया है। इस मौके पर पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल, डॉ. निर्मल सिंह, प्रीती वर्मा पांडे, गौरव शर्मा, प्रहलाद पटेल, मोहन कुमार तायल आदि मौजूद रहे।

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16 अक्टूबर को राष्ट्रपति भवन में होगा यात्रा का समापन

कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि देश में जिन बच्चों के साथ यौन शोषण होता है, उनके माता-पिता शिकायत करने से डरते हैं कि बदनामी होगी। इसी चुप्पी को तोडऩे के लिए भारत यात्रा शुरू की गई है। यह एक युद्ध है, जो माता-पिता को जागरूक करने के लिए छेड़ा गया है। यह यात्रा समाज से बाल हिंसा के कलंक को खत्म करने के लिए आयोजित की जा रही है। यात्रा 11 सितंबर से शुरू हुई है और देश के 22 राज्यों से होते हुए करीब 11 हजार किलोमीटर की दूरी तय करेगी। यात्रा का समापन 16 अक्टूबर को राष्ट्रपति भवन में होगा। उन्होंने कहा कि यह यात्रा लैंगिक उत्पीडऩ के प्रति समाज की मानसिकता को बदलने की सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्रांति की प्रतीक है।

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