वो तड़प-तड़प कर मरती रही, सभ्य समाज करता रहा चित्रकारी!

वो तड़प-तड़प कर मरती रही, सभ्य समाज करता रहा चित्रकारी!



photo source: yugbharat.com

प्रदीप सिंह

लखीमपुर-खीरी। ”वो तड़प-तड़प कर मरती रही, सभ्य समाज करता रहा चित्रकारी!’‘ मुख्यमार्ग पर हजारों वाहनों व सभ्य समाज के सभ्य नागरिकों की आवाजाही बगैर किसी रोक-टोक के जारी थी। पर, जरूरत थी इन्सायित की, वो न नागरिकों में दिखी और न ही सभ्य नागरिकों से सुसज्जित वाहनों में। वहीं, घटनास्थल पर मौजूद लोग तमाशबीन बन अपने अंदर हिलोरे मार रही फोटोग्राफी की प्रतिभा को निखारने में व्यस्त थे। अगर किसी ने मानवता दिखाई होती तो शायद छात्रा की जान बच जाती, जबकि महज 500 मीटर की दूरी पर अस्पताल था। लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। अंतत: छात्रा की मौत हो गई। गौरतलब है कि देश का प्रधानमंत्री वैश्विक व राष्ट्रीय अधिवेशनों में ‘पढ़ेगी बेटी तो बढग़ी बेटी’ पर अत्यधिक जोर देते हैं।

खत्म होने के कगार पर मानवीय संवेदनाएं

सदर कोतवाली के ग्राम मीरपुर निवासी देशराज वर्मा ने प्रधानमंत्री की बातों पर गैार करते हुए अपनी पुत्री पारूल वर्मा जो कि 12वीं की छात्रा थी तो पढ़ा कर बढ़ाने का प्रयास कर रहे थे। ज्ञात हो कल जहा राष्ट्र एक ओर ‘बकरीद’ का त्यौहार मनाने में मशगूल था। पारूल नित्य रोज की भांति मो. महराज नगर स्थित कोचिगं से पढ़ कर साइकिल से अपने घर वापस जा रही थी। सौजन्या चौराहे के निकट मुख्य मार्ग पर ही नगर पालिका परिषद द्वारा बनाए गए अस्थाई कूड़ा घर के पास दो आवारा जानवर आपस में लड़ रहे थ। लड़ते लड़ते वे मुख्य मार्ग पर आ गए, जिसके बचाव में छात्रा बीच राह आ गई।

वहीं, राजापुर की ओर जा रही अनुबंधित बस ने पारूल को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे वह गम्भीर रूप से घायल हो गई। बस चालक हर घटना की तरह भागने में सफल रहा। जोरदार टक्कर से घायल खून से लथपथ छात्रा इलाज के बिलबिलाती रही और हर घटना के बाद कैन्डिल मार्च निकाल इन्साफ की गुहार लगाने वाले सभ्य समाज के नुमाइन्दे अपने भीतर छुपे चित्रकारी के जौहर को प्रदर्शित करने में व्यस्त हो गए।

समय पर न पुलिस पहुंची और न एम्बुलेंस

राज्य व केन्द्र सरकार जो घटना स्थल पर तत्काल राहत व वाहन उपलब्ध कराने का दंभ भरती है। वो एकाएक नपुसंक हो गई। तमाम सुविधाओं को मानों ग्रहण सा लग गया था। हां,  इस दरम्यान कुछ लोगों ने यूपी 100 व 108 एम्बुलेंस को फोन अवश्य किया था, लेकिल आधे घंटे तक कोई भी वाहन मौके पर पहुंचने में नाकाम रहा। परिणामस्वरूप घायल छात्रा को टेम्पो से जिला अस्पताल पहुचाया गया, जहां उसे समय पर इलाज न मिलने के कारण डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया गया।

घटना के बाद भी नहीं सुधरे हालात

समाज ने मानों संवेदनाएं ताक पर रख दी हैं। जिम्मेदारों ने महज एक रोज पूर्व की घटना में जहां छात्रा को जान गंवानी पड़ी, से कोई सबक नहीं लिया। जिस कूड़ा स्थल पर जानवरों की भिड़न्त के कारण पारूल को जान गंवानी पड़ी। वहां घटना के दूसरे दिन भी दर्जनों आवारा जानवरों का जमावड़ा बदस्तूर लगा हुआ था। जैसे कि मानों कुछ हुआ ही नहीं। किसी जिम्मेदार ने घटना से कोई सबक ही नहीं लिया।

एक किसान की बेटी ही तो थी डीएम तो थी नहीं

जिलाधिकारी व पुलिस अधिक्षक जाम में फंसे तो नगर में एक विशेष अभियान चलाकर सडक़ों को अतिक्रमण मुक्त करने में पूरा सरकारी अमला लग गया था। वहीं दूसरी ओर छात्रा की मौत की तो किसी को परवाह ही नहीं।

उचित समय पर ही क्यों नदारद रहते हैं सरकारी वाहन

चंद रोज पूर्व निघासन मार्ग पर सिरफिरे द्वारा नाबालिग पर जानलेवा हमला कर दिया गया था। उक्त मसले में भी घायल को किसी सरकारी वाहन कि सुविधा समय रहते नहीं उपलब्ध हो सकी थी, ठीक उसी तरह इस घटना में भी घायल छात्रा को किसी भी सरकारी वाहन का सहयोग समय रहते नहीं मिला, जिस कारण छात्रा की मौत हो गई।


You may also like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *