कवि सम्मेलन: 'लंकेश जिन्दा हो गया, आज के दौर में'

कवि सम्मेलन: ‘लंकेश जिन्दा हो गया, आज के दौर में’



गोला गोकर्णनाथ, खीरी। श्री हनुमान मंदिर सुहेला पर चल रहे प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के अन्तिम दिन विराट कवि सम्मेलन का आयोजन कवि ओम नीरव की अध्यक्षता में किया गया। जिसमें देश के कोने कोने से आये साहित्यकारों ने काव्य रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।

विराट कवि सम्मेलन का शुभारम्भ मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल विशिष्ट अतिथि सुर्जनलाल वर्मा ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कराया। इसके उपरान्त वरिष्ठ साहित्यकार पवन बाथम ने वाणी वन्दना प्रस्तुत की। एटा से पधारे ओज कवि बलराम सरस ने पढा आदम परिन्दा हो गया है आज के दौर में, लंकेश जिन्दा हो गया, आज के दौर में। कन्नौज से पधारे युवा कवि देवेश दीक्षित ने कुछ यूं बयां किया तुम्हारे साथ जो गुजरे जमाने याद आते हैं, मिलन के गीत, वो मौसम सुहाने याद आते हैं। फर्रुखाबाद से आई कवियत्री गीता भारद्वाज ने ओजस्वी हुंकार भरते हुए कहा कि वाणी पुत्रों की कलम हूं मै, स रे गम का गान नहीं। भारत मां की हुंकार हूं मै, वीणा की मधुरिम तान नहीं।

हास्य कवि वैभव सोमवंशी मोबाइल का बखन करते हुए कहा कि देखो जमाना आज कितना व्यस्त हो गया। ले एन्ड्रायड फोन उसी में मस्त हो गया। वरिष्ठ साहित्यकार पवन बाथम ने श्रंगार के गीत पढते हुए कहा कि एक तन्हाई है जो कि जाती है नहीं। आपकों याद लगता है आती नहीं। आपकी शक्ल ने दिल में दस्तक यूं दी मुझकों अब कोई सूरत लुभाती नहीं। सभाध्यक्ष ओमनीरव ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि सीतस सी वामा चाहो तो राम तुम्हे बनना होगा। करना है यदि राज ताज तो कांटो का रखना होगा। इसके अलावा कुलदीप ठाकुर, मधुकर शैदाई, डा. वेदप्रकाश अग्निहोत्री ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके पर नानक चंद वर्मा, काशी विश्वनाथ तिवारी, पियूष मिश्र, ज्ञानेंन्द्र सिंह, मधु त्रिपाठी, जया अग्निहोत्री, जयप्रकाश अवस्थी, राममोहन सोनी आदि मौजूद रहे।


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