खीरी का ये प्राइमरी स्कूल बना मिसाल, छात्रों के साथ अभिभावकों को भी किया सम्मानित

खीरी का ये प्राइमरी स्कूल बना मिसाल, छात्रों के साथ अभिभावकों को भी किया सम्मानित



Lakhimpur Khiri. कहते हैं कि जब इच्छाशक्ति हो तो अंधेरे में भी अलख जगाई जा सकती है। कुछ इसी तरह का काम खीरी के एक उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक ने किया है, जो अपने आप में एक मिसाल है। स्वच्छता, शिक्षा की गुणवत्ता और हर मौकों पर जागरूकता के मामले में अन्य सरकारी स्कूलों से आगे है। 15 अगस्त पर बच्चों और उनके अभिभावकों को सम्मानित भी किया गया।

लखीमपुर खीरी जिले जमुनहा गांव में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय विद्यार्थियों के लिए गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा व्‍यवस्‍था के साथ-साथ बड़ा स्‍वच्‍छता अभियान को बढ़ावा देने वाला माहौल और ऐसी कई चीजें हैं जो देश के बाकी स्‍कूलों के लिए स्‍वप्‍न सरीखी हैं। इस स्‍कूल को आदर्श स्कूल बनाने का ज्‍यादातर श्रेय यहां के इंचार्ज अरविंद कुमार को जाता है।

जहां एक तरफ लोग स्‍कूल में सुविधाएं बढ़ाने के लिये सरकार से आस लगाते हैं। वहीं, अरविंद ने इसे व्‍यक्तिग‍त जिम्‍मेदारी समझते हुए स्कूल को तमाम ऐसी सुविधाओं से लैस किया, जिससे ज्यादा से ज्यादा बच्चों को अच्छा ज्ञान हासिल हो सके और स्कूल की ओर आकर्षित हो सकें। स्‍कूल में बच्चों के लिए एक लैब का निर्माण किया गया, जो दिखने में काफी आकर्षक है। बच्चों की जागरूक करने के लिए अक्सर जागरूकता अभियान चलाये जाते हैं।

15 अगस्त पर देशभक्ति के कार्यक्रम में भी बच्चों और उनके अभिभावकों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया है। इंचार्ज अरविंद पटेल ने बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के लिए सम्मानित भी किया है। इसके साथ ही अभिभावकों और गांव के संभ्रांत लोगों को भी सम्मानित किया गया, जिसे लेकर गांव के अभिभावकों में बच्चों की शिक्षा को लेकर जागरूकता भी काफी बढ़ी है। अरविंद पटेल ने बताया कि स्वच्छता, स्वास्थ्य और तमाम तरह के जागरूकता अभियानों से बच्चों और अभिभावकों को जागरूक करने के लिए रैलियां भी निकाली जाती हैं।

अरविंद के मुताबिक, शिक्षा व्‍यवस्‍था को मनोवैज्ञानिक तरीके से ऐसा रूप दिया गया कि बच्‍चों को पढ़ाई बोझ न लगे। परिसर को कौतूहलपूर्ण बनाने के लिये फुलवारी तैयार की गई, वृक्ष लगाए गए हैं, लेकिन बाउंड्रीबाल न होने के कारण लोग तोड़ डालते हैं। उन्होंने बताया कि सहायक शिक्षक प्रदीप कुमार पाल भी उनका सहयोग करते हैं।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में 126 विद्यार्थी हैं, लेकिन स्कूल में सिर्फ दो ही शिक्षक हैं। बता दें कि उच्च प्राथमिक विद्यालय में 120 बच्चों पर कम से कम चार शिक्षक और तीन अनुदेशक होने चाहिए। इसके अलावा एक प्रधानाचार्य की जरूरत है, लेकिन यहां सिर्फ दो शिक्षक है और अनुदेशक एक भी नहीं है।

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