पूर्व सीएम शीला दीक्षित ने राहुल गांधी को लिखे अंतिम पत्र में कही थी ये बड़ी बात

पूर्व सीएम शीला दीक्षित ने राहुल गांधी को लिखे अंतिम पत्र में कही थी ये बड़ी बात



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New Delhi. दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का 81 साल की उम्र में निधन हो गया है। व​ह पिछले काफी दिनों से बीमार थीं, उनका दिल्ली में अस्पताल में इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर से राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित तमाम नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

Sheela Dixi

दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित ने निधन की खबर पर किसी को विश्वास नहीं हो रहा है, क्योंकि अंतिम दिनों तक वह राजनीति में सक्रिय रहीं। उनके राजनीतिक बयान आ रहे थे, अभी हाल ही में उन्होंने दिल्ली में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की थी। वहीं, लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद शीला दीक्षित ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने गईं थी, लेकिन राहुल गांधी उस समय किसी नेता से मिलना नहीं चाहते थे।

इसके बाद शीला दीक्षित ने राहुल गांधी को पत्र लिखा था। उन्होंने पत्र में कहा था, राहुल गांधी को अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं देना चाहिए, वह चाहती हैं कि राहुल अध्यक्ष पद पर बने रहें, अन्यथा बहुत ही कष्टकारी होगा। उन्होंने कहा कि हार—जीत तो पार्टी का हिस्सा होती है, लेकिन अहम यह है कि हमें लड़ाई जारी रखनी होगी। उन्होंने कहा था कि हम हारे हैं, इसकी समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने लिखा था कि हम इंदिरा गांधी के समय में भी हारे थे।

बता दें कि शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च, 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस से मास्टर किया था। शीला दीक्षित का विवाह उत्तर प्रदेश के उन्नाव में आईएएस अधिकारी विनोद दीक्षित से हुआ था। विनोद दीक्षित कांग्रेस नेता एवं बंगाल के पूर्व राज्यपाल उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे। शीला दीक्षित के बेटा और एक बेटी है, बेटा संदीप दीक्षित दिल्ली से सांसद रह चुके हैं।

Sheela Dixi

शीला दीक्षित 1998 से 2013 तक लगातार 15 साल दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं। हालांकि इसके पहले वो राजीव गांधी सरकार में केंद्रीय मंत्री थीं। दिल्ली में 2013 में आम आदमी पार्टी की सरकार बन गई थी, जिससे शीला दीक्षित को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद कांग्रेस ने 2014 में उन्हें केरल का राज्यपाल बनाया था।

बता दें कि कांग्रेस ने शीला दीक्षित को जनवरी में ही दिल्ली की कमान सौंपी थीं, वह निधन से पहले तक राजनीति में सक्रिय थीं। उन्होंने कुछ दिन पहले ही दिल्ली में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की थी।


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