मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने लिया बड़ा फैसला, बीजेपी में मची खलबली

मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने लिया बड़ा फैसला, बीजेपी में मची खलबली



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New Delhi. कर्नाटक में सत्ता को लेकर चल रही जद्दोजहद के बीच कांग्रेस-जदएस सरकार के मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने विधानसभा में ऐसा पासा चल दिया, जिससे भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से फंसी हुई नजर आ रही है। बता दें कि बागी विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मंगलवार तक विधानसभा स्पीकर के किसी भी तरह का फैसला लेने पर रोक लगा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद विधानसभा में सत्र के दौरान मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने सदन में विश्वासमत कराने को तैयार रहने की बात कहकर एक बड़ा पासा चल दिया था, जिससे बीजेपी पूरी तरह से फंस गई है। यहां तक कि अब बीजेपी को अपने विधायकों को लेकर रिसार्ट पहुंचना पड़ गया है, क्योंकि उन्हें खरीद फरोख्त से बचाया जा सके।

कांग्रेस और जदएस गठबंधन भी विश्वासमत हासिल करने से पहले ही अपने विधायकों को रिसार्ट भेज दिया है, जिससे खरीद फरोख्त न हो सके। कांग्रेस ने अपने 79 में से 50 विधायकों को शहर के बाहर एक रिसार्ट भेजा है। बता दें कि कांग्रेस के 13 विधायकों ने विधानसभा से अपना इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा कुछ अन्य विधायक विधानभवन के पास के रिसार्ट में ही ठहरे हुए हैं। जदएस ने भी अपने करीब 30 विधायकों को रिसार्ट भेज दिया है। कांग्रेस और जदएस दोनों पार्टियां अपने विधायकों पर पूरी नजर बनाए हुए हैं।

बता दें कि कर्नाटक में 224 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 113 विधायकों का समर्थन जरूरी है। अध्यक्ष के अलावा सत्तारूढ़ गठबंधन का कुल संख्याबल 116 (कांग्रेस-78, जद(एस)-37 और बसपा-1) है। दो निर्दलीय उम्मीदवारों का भी सरकार को समर्थन प्राप्त था, लेकिन, उन्होंने सोमवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। वहीं, भाजपा के पास 107 विधायक हैं। यदि 16 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाते हैं तो गठबंधन का संख्याबल घटकर 100 रह जाएगा।

माना जा रहा है कि सदन में विश्वासमत ​हासिल करने के लिए कुमारस्वामी सरकार विधायकों को व्हिप जारी कर सकती है। व्हिप जारी होने के बाद विधायकों का सदन में रहना जरूरी होता है। ऐसे में यदि बागी विधायक प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे या अनुपस्थिति रहेंगे तो विधानसभा अध्यक्ष उनकी दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द कर सकती है। ऐसे में बीजेपी की यदि सरकार भी बनती है तो उसे कोई फायदा नहीं होगा।

बता दें कि दल बदल कानून और संविधान के अनुच्छेद 164(1बी) के तहत अगर एक विधायक की सदन से सदस्यता रद्द कर दी जाती तो है वह तब तक मंत्री नहीं बन सकेगा/सकेगी, जब तक वह दोबारा चुनाव लड़कर विधायक न बन जाए। यही नहीं, किसी अन्य दल को समर्थन भी नहीं कर सकता है। ऐसे में कुमारस्वामी सरकार के पासे में बीजेपी पूरी तरह से फंस गई है। हालांकि आगे क्या होता है ये तो देखने वाली बात होगी।

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