खीरी: विकास की आंड़ में जातीय समीकरण साध रहे उम्मीदवार

खीरी: विकास की आंड़ में जातीय समीकरण साध रहे उम्मीदवार



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Lucknow. लोकसभा चुनाव को लेकर खीरी लोकसभा सीट पर सियासत काफी तेज है। यहां जातीय समीकरण के साथ स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दे भी अहम हैं। प्रत्याशियों को मौसम के साथ-साथ राजनीतिक तापमान का भी अहसास हो रहा है। जातीय गोलबंदी स्पष्ट है, लेकिन उसमें सेंधमारी की जद्दोजहद में प्रत्याशियों को खूब पसीना बहाना पड़ रहा है। मतदाताओं का लक्ष्य भी स्पष्ट है, लेकिन उनका मिजाज भांपने में उम्मीदवारों को खाक छाननी पड़ रही है।

खीरी सीट पर मुख्य लड़ाई गठबन्धन की प्रत्याशी डॉ. पूर्वी वर्मा, भाजपा से सांसद अजय मिश्र टैनी और कांगेस के जफर अली नकवी के बीच है। सभी प्रत्याशी जातीय समीकरण के आधार पर वोटरों को साधने का हरसम्भव प्रयास कर रहे हैं। जातिवाद का बोया गया बीज आज हाईटेक युग में राजनीतिक और जातीय संगठनों के हाथों पोषित होकर एक विशाल दैत्य का रूप धारण कर चुका है।

वर्तमान में देश के प्रति अपने कर्तव्यों को राजनेता भूल कर जातिवाद के नाम पर आयोजन कर वोट बैंक तैयार करने में लगे है। कभी नदी के दो तट मानी जाने वाली सपा और बसपा ने लोकसभा चुनाव में भाजपा को मात देने के लिए 23 साल पुरानी शत्रुता को भुलाते हुए एक-दूसरे से हाथ मिलाकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नयी इबारत लिख दी है।

डॉ. पूर्वी वर्मा कुर्मी वोटरों के साथ दलित और मुस्लिम वोटरों के सहारों चुनावी वैतरणी पार करने की जहां पुरजोर कोशिश करने में लगी हैं। वहीं, भाजपा प्रत्याशी अजय मिश्र टेनी ब्राहम्ण, वैश्य के साथ अन्य जातियों के अन्य मतदाताओं, विकास व मोदी के नाम पर अपनी जीत सुनिश्चित मान रहे हैं। जबकि कांग्रेस प्रत्याशी जफर अली नकवी मुस्लिम वोटरों और केंद्र सरकार की सत्ताधारी पार्टी के 2014 के घोषणा पत्र को मुद्दा बनाकर जीत पक्की बता रहे हैं।

सभी प्रत्याशियों द्वारा चुनाव का रूख अपनी ओर मोड़ने के लिए हर हथकंडा अपनाया जा रहा है। विकास की बात सभी कर रहे हैं, लेकिन असली चुनावी फैक्टर जातीय का बनाने की कोशिश है। जबकि प्रत्याशी विकास के मुद्दे पर ही चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं, लेकिन पर्दे के पीछे जो जातीय समीकरण साधने का खेल चल रहा है, उससे वोटर अच्छी तरह समझ रहा है। अभी तो भविष्य के गर्त में हैं, 23 मई को पता चलेगा।

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