अखिलेश यादव की करीबी महिला नेता कांग्रेस में शामिल, कही ये बड़ी बात

अखिलेश यादव की करीबी महिला नेता कांग्रेस में शामिल, कही ये बड़ी बात



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New Delhi. आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी के लिए बड़ी खबर आई है। दरअसल, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की करीबी महिला नेता ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। महिला नेता के कांग्रेस में शामिल होने से सपा को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

दरअसल, समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता रहीं पंखुड़ी पाठक कांग्रेस शामिल में शामिल हुई हैं। कांग्रेस प्रवक्ता बनाए जाने के बाद पंखुड़ी ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा संविधान की विचारधारा है और उस पर मैं पूरी तरह से विश्वास रखती हूं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी द्वारा जिस तरह युवाओं को पार्टी में जगह और बढ़ावा दिया गया है उससे और हिम्मत मिली। कांग्रेस एक मात्र पार्टी है, जिसकी पहचान किसी समुदाय, जाति या धर्म से नहीं बल्कि अपनी विचारधारा से है। यहां हर व्यक्ति को उसकी प्रतिभा के आधार पर समान अवसर मिलता है।

उन्होंने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा देने के बाद अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था, मैं सामाजिक मुद्दों पर काम करना चाहती हूं। मेरी रुचि शुरुआत से सामाजिक मुद्दों पर काम करने की रही है।

सपा का प्रवक्ता रहते हुए भी मैंने कई सामाजिक मुद्दों को उठाया, लेकिन कई बार जब आपकी पार्टी किसी मुद्दे को उतनी संजीदगी एवं गंभीरता से नहीं उठाती तो आप बंध कर रह जाते हैं।

आप चाहकर भी उन मुद्दों पर काम नहीं कर पाते। कई सारे ऐसे मुद्दे हैं जिन पर मैं काम करना चाहूंगी जैसे कि मैंने व्यक्तिगत स्तर पर मॉब लिंचिंग पर काम किया, लेकिन मेरी पार्टी ने इस मुद्दे को उस तरह से नहीं उठाया जैसा कि उसे उठाना चाहिए था।

मैं किसी सामाजिक संगठन से जुड़कर या व्यक्तिगत स्तर पर बेरोजगारी और इस तरह के अन्य मुद्दों पर काम करने की सोच रही हूं। किसी राजनीतिक दल से जुड़ने से पहले मैं इन मुद्दों पर काम करना चाहूंगी।

सपा से इस्तीफा देने के सवाल पर उन्होंने कहा था, सपा से मेरी आपत्ति वैचारिक मतभेद को लेकर है। मुझे लगता है कि पार्टी अपनी विचारधारा से भटक गई है। सपा से जिस वक्त में जुड़ी उस समय अखिलेश को एक प्रोग्रेसिव फेस के रूप में देखा जाता था।?

सरकार में रहते हुए उन्होंने अच्छे काम किए। उस समय कोई भेदभाव नहीं था, जाति-धर्म की बातें नहीं होती थीं। मैंने अखिलेश के पांच साल के कार्यकाल में कभी नहीं देखा कि उन्होंने किसी एक जाति विशेष के लोगों के साथ भेदभाव किया हो या किसी खास समुदाय को महत्व और बढ़ावा दिया हो, लेकिन विधानसभा चुनाव हारने के बाद से सपा में जातिगत भावना अचानक से बढ़ गई। पार्टी में जातिवादी माहौल बनने लगा। इसे लेकर मैं बहुत सहज नहीं थी।

पार्टी के बहुत सारे लोग मेरी जाति को लेकर अशिष्ट एवं अभद्र टिप्पणियां करते थे, जिस समय अखिलेश सीएम थे उस समय माहौल अलग था लेकिन अभी सपा में भाई-भतीजावाद, जातिवाद की भावना हावी हो गई है और शायद इन्हीं कारणों से गौरव भाटिया ने पार्टी छोड़ी।

उन्होंने कहा था, मुझे पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया। मुझे लगता है कि जो लोग ईमानदारी से पार्टी के लिए मेहनत कर रहे हैं उन्हें आंतरिक राजनीति में उलझाकर इतना दबाव बना दिया जाता है कि उनके पास पार्टी छोड़ने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रह जाता।

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