अखिलेश यादव कांग्रेस को दे सकते हैं ये सात सीटें, गठबंधन की अटकलें तेज

अखिलेश यादव कांग्रेस को दे सकते हैं ये सात सीटें, गठबंधन की अटकलें तेज



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Lucknow. आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने गठबंधन के बाद सीटों को लेकर भी ऐलान कर दिया गया है। माना जा रहा था कि सपा—बसपा में सीटों को लेकर पेंच फंस सकता है, लेकिन दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की पहल से कोई पेंच नहीं फंसा बल्कि मायावती ने अखिलेश को पांच खास सीटें भी दे दी है। जानकार कयास लगाते रहे कि पिछले चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर ही सीटें तय होंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने संगठन की ताकत व तैयारियों का ध्यान रखते हुए अपनी सीटों का चुनाव किया।

उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने गठबंधन किया है, लेकिन हाल ही में सीटों के बंटवारे के दौरान देखने को मिला कि गठबंधन दल की कप्तान मायावती ही हैं। दरअसल, सीट बंटवारे में लगभग दो दर्जन सीटें ऐसी रहीं जिन पर पिछले चुनाव में नंबर 2 पर होने के बावजूद उस दल के खाते में वह सीट नहीं गई।

बताया जा रहा है, इसके पीछे जातीय समीकरण व उम्मीदवार की साख अहम फैक्टर है। जैसे की गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) सीट पर बसपा पिछले चुनाव में तीसरे नंबर पर थी, लेकन स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मायावती ने इसे अपने खाते में ले लिया। वहीं सपा-बसपा गठबंधन में पांच सीटें ऐसी हैं, जिन पर कांग्रेस पिछले चुनाव में नंबर 2 थी, वह सपा के खाते में गई हैं।

इसके पीछे क्या कारण है ये तो फिलहाल स्पष्ट नहीं, लेकिन सपा से जुड़े सूत्र कह रहे हैं कि ये ‘बहन जी’ की इच्छा थी।

कुशीनगर, सहारनपुर, गाजियाबाद, बाराबंकी, कानपुर, लखनऊ सीटों की बात की जाए तो सहारनपुर के अलावा बाकी सभी सीटें सपा के खाते में गई हैं। इन सीटों पर कांग्रेस का अभी भी काफी प्रभाव है। इनमें लखनऊ, कानपुर, बाराबंकी व कुशीनगर सीट पर ‘प्रियंका फैक्टर’ भी अहम साबित हो सकता है।

वहीं, कांग्रेस सूत्रों की मानें तो अभी पूरी तरह से ‘गठबंधन’ की संभावना खत्म नहीं हुई हैं। अगर गठबंधन नहीं भी हुआ तो कुछ सीटों पर कांग्रेस व सपा ‘म्यूचुअल अंडरस्टैंडिंग’ के आधार पर चुनाव लड़ेंगे, ताकि अल्पसंख्यक वोट का बिखराव न हो। हालांकि, कई जानकार ये भी कह रहे हैं कि अगर अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी में सहमति बनी तो सपा अपने हिस्से की 5 सीटें कांग्रेस को दे सकती है।

ये वो 5 सीटें हैं, जहां 2014 में कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी। इसके बदले में कांग्रेस भी सपा के लिए कुछ सीटें छोड़ सकती है। वहीं, कुछ सीटों पर बीजेपी के कोर वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए जातीय समीकरण के आधार पर उम्मीदवार खड़ा सकती है, जिसका लाभ महागठबंधन को मिलेगा।

बीजेपी से नाराज़ चल रहे अपना दल, ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा, शिवपाल यादव की प्रसपा, राजा भैया की जनसत्ता दल, निषाद पार्टी, पीस पार्टी व आम आदमी पार्टी का जल्द रुख स्पष्ट होने की उम्मीद है।

सपा-बसपा गठबंधन में जगह न मिलने के कारण इनमें से कई दल कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं। उपचुनाव में सपा-बसपा को समर्थन देने वाली निषाद पार्टी व पीस पार्टी इस बार अपना रुख बदल सकती हैं।

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