जानें कौन है ये रिटायर्ड अफसर, जिनकी मदद से हर साल 20 से 25 मुस्लिम युवा बनते हैं IAS-IPS

जानें कौन है ये रिटायर्ड अफसर, जिनकी मदद से हर साल 20 से 25 मुस्लिम युवा बनते हैं IAS-IPS



नई दिल्ली। युवा मुस्लिम प्रतिभाओं के सपनों को पंख देने के लिए दिल्ली में एक ट्रेनिंग सेन्टर चलाया जाता, जिसका नाम ज़कात फाउंडेशन है। जहां पर आईएएस और आईपीएस का सपना दिखाने के लिए बच्चों को ट्रेनिंग दी जाती है और साथ रहने खाने—पीने की तमाम सहूलियत दी जाती हैं। दरअसल, ये सब काम कोई और बल्कि प्रधानमंत्री के ओएसडी रह चुके रिटायर्ड आईएसएस अफसर ने कर दिखाया है।

प्रधानमंत्री के ओएसडी रहे चुके और सच्चर कमेटी में अहम रोल निभाने वाला ये रिटायर्ड अफसर डॉ. ज़फर महमूद अब युवाओं को आईएएस-आईपीएस बनने की राह दिखा रहा है। अफसर और उनकी संस्था की मदद से हर साल 20 से 25 मुस्लिम और क्रिश्चियन युवा सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर रहे हैं। डॉ. ज़फर महमूद 2008 से युवाओं को सिविल सर्विस की तैयारी करा रहे हैं। अब तक 100 से अधिक युवा ज़कात की मदद से देश की सबसे बड़ी परीक्षा पास कर आईएएस और आईपीएस बन चुके हैं। 16 और 18 सफल उम्मीदवारों से शुरु हुआ कामयाबी का सिलसिला अब 26 पर पहुंच चुका है, एक रिटर्न टेस्ट और इंटरव्यू के बाद देश के हर कोने से मेरिट के आधार पर युवाओं का चयन किया जाता है।

डॉ. जफर का कहना है कि एक बैच के लिए हम 50 लड़कों का चुनाव करते हैं। लेकिन लड़कियों के लिए सीट की कोई सीमा नहीं है। लिखित परीक्षा और इंटरव्यू पास करने के बाद चाहें जितनी लड़कियां कोचिंग के लिए आ सकती हैं। हालांकि अभी तक एक बैच में 10 से 12 लड़कियां आती हैं, जिसमें से तीन से पांच लड़कियां कामयाब हो रही हैं। डॉ. जफर का कहना है कि वो जब एएमयू में पढ़ते थे वो खुद और उनके कई दोस्त सिविल सर्विस की तैयारी करना चाहते थे। लेकिन मदद करने वाला कोई कोचिंग सेंटर नहीं था। दूसरा ये कि मैं खुद भी सच्चर कमेटी में रहा था। रिपोर्ट में जो हाल मैंने देखा तो उसके बाद लगा कि वाकई सिविल सर्विस की तैयारी कराने के लिए इस तरह का कोई सेंटर होना जरूर चाहिए।

डॉ. जफर का कहना है कि दिल्ली में हमारे पास चार हॉस्टल हैं। सबसे पहले हम चुने गए लड़के-लड़कियों को दिल्ली की कुछ अलग-अलग कोचिंग में दाखिला दिलाते हैं। इसका खर्च जक़ात फाउंडेशन ही उठाती है। कोचिंग में पढ़ाई करने के बाद शुरू होती है जक़ात फाउंडेशन की पढ़ाई। रिटायर्ड अफसर डॉ. ज़फर महमूद बताते हैं कि दिल्ली में रखकर युवाओं को तैयारी कराई जाती है। युवाओं को अलग-अलग कोचिंग में भेजा जाता है। हॉस्टल में युवाओं के लिए रहना-खाना और स्टडी मेटेरियल तक का इंतज़ाम ज़कात फाउंडेशन की ओर से किया जाता है। युवाओं की तैयारी कैसी चल रही है और तैयारी में उन्हें मदद करने के लिए रिटायर्ड और सर्विस में मौजूद आईएएस, आईपीएस आईआरएस, आईएफएस सरीखे अधिकारियों की भी मदद ली जाती है।

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जक़ात फाउंडेशन एक एनजीओ है। ये पूरी तरह से दूसरे लोगों द्वारा की गई मदद से ही चलती है। मदद के रूप में जक़ात फाउंडेशन को नाम के अनुसार जक़ात, सदका, इमदाद और चैरेटी के रूप में पैसा मिलता है। इसी का इस्तेमाल जक़ात फाउंडेशन सर सैय्यद कोचिंग एंड गाइडेंस सेंटर फॉर सिविल सर्विस को चलाने में करती है। डॉ. जफर का कहना है कि वो जब एएमयू में पढ़ते थे वो खुद और उनके कई दोस्त सिविल सर्विस की तैयारी करना चाहते थे। लेकिन मदद करने वाला कोई कोचिंग सेंटर नहीं था। दूसरा ये कि मैं खुद भी सच्चर कमेटी में रहा था। रिपोर्ट में जो हाल मैंने देखा तो उसके बाद लगा कि वाकई सिविल सर्विस की तैयारी कराने के लिए इस तरह का कोई सेंटर होना जरूर चाहिए।


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