वो रहना चाहती थी हीरालाल के साथ, लेकिन कोर्ट ने कहा..दुरुपयोग नहीं

वो रहना चाहती थी हीरालाल के साथ, लेकिन कोर्ट ने कहा..दुरुपयोग नहीं



Lucknow. हाई कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है। दरअसल, एक महिला अपने पति को छोड़ दूसरे के साथ रहना चाहती थी, लेकिन कोर्ट उसे इसकी इजाजत देने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि तथ्यों के मद्देनजर उसे इस केस में किसी प्रकार के निर्देश जारी करने की आवश्यकता नहीं प्रतीत होती है। यह आदेश जस्टिस अजय लांबा व जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की बेंच ने गायत्री उर्फ संगीता की याचिका खारिज कर दी है। संगीता ने इस याचिका में दूसरे व्यक्ति हीरालाल उर्फ झुर्रा को भी याची बनाया था, जिसके साथ वह वर्तमान में रह रही है।

याचिका में संगीता का कहना था कि करीब दस साल पहले उसकी शादी सीताराम के साथ हुई थी, जिससे उसे सात साल और तीन वर्ष की दो बेटियां हैं। उसका मायका बिहार में है लिहाजा उसके मायके वाले उसकी खोजखबर नहीं ले पाते हैं। पति ने उसे पीटकर 20 जुलाई 2018 को घर से निकाल दिया था, जिसके बाद वह उसी गांव के 45 वर्षीय हीरालाल उर्फ झुर्रा के साथ अपनी मर्जी से रह रही है और उसी के साथ अपना जीवन सुरक्षित महसूस करती है। अब वह हमेशा हीरालाल के साथ ही रहना चाहती है।

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याचिका का विरोध करते हुए अपर शासकीय अधिवक्ता रवि सिंह सिसोदिया ने तर्क दिया कि पति ने हीरालाल के खिलाफ बहराइच की कोतवाली देहात पर 25 जुलाई 2018 के आईपीसी की धारा 498 के तहत एनसीआर दर्ज करवाई है जिसमें उसने कहा है कि उसकी पत्नी को हीरालाल भगा ले गया है। उनका तर्क था कि एनसीआर पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। सिसोदिया ने यह भी तर्क दिया कि यदि पति पत्नी को मारता पीटता था तो उसे कानून का सहारा लेना चाहिए था और इस प्रकार बिना पति से तलाक लिए कोर्ट के आदेश का सहारा लेकर वह गैरकानूनी तरीके से दूसरे व्यक्ति के साथ बतौर पत्नी के रहना चाहती है जिसके लिए कोर्ट का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है। याचिका पर सुनवायी के बाद कोर्ट ने पाया कि इस मामले में उसे दखल देने की जरूरत नहीं है। इसी तर्क के साथ कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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