बसपा सुप्रीमो मायावती ने खेला बड़ा दांव, कांग्रेस और भाजपा में हड़कम्प

बसपा सुप्रीमो मायावती ने खेला बड़ा दांव, कांग्रेस और भाजपा में हड़कम्प



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Lucknow. आगामी लोकसभा चुनाव 2019 की तारीख जैसे—जैसे नजदीक आ रही है, राजनीतिक दल नई—नई पैंतरेबाजी शुरू कर रहे हैं। दरअसल, विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए गठबंधन को लेकर रणनीति बना रहे हैं, इस बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस को करारा झटका दिया। मायावती ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस से गठबंधन को लेकर कांग्रेस के संजोए सपने को पल भर में तोड़ दिया। मायावती ने ऐलाल किया इन राज्यों में बसपा अकेले चुनाव में उतरेगी।

आगामी लोकसभा चुनाव में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को तब करारा झटका लगा है, जब मायावती ने प्रेस कांन्फ्रेंस कर कांग्रेस ने गठबंधन को नकार दिया। मायावती ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस हमें 200 में से सिर्फ 9 सीटें दे रही थी। मध्य प्रदेश में 230 में से 15-20 और छ्तीसगढ़ में 90 में से सिर्फ 5-6 सीटों पर ही वह राजी हो रही थी। बसपा को इस गठबंधन से ज्यादा नुकसान होता क्योंकि उसके सारे वोटर कांग्रेस की ओर शिफ्ट हो जाते। दलितों को अपना वोटबैंक समझने वाली बीएसपी और मायावती तीनों राज्यों में ज्यादा सीटें चाहती हैं। एमपी में लगभग 15 फीसदी, राजस्थान में लगभग 17 फीसदी और छत्तीसगढ़ में 12 फीसदी के आसपास दलित मतदाता हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा को मध्य प्रदेश में 6.3 पर्सेंट वोट मिले थे जबकि बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोटों का अंतर 8 पर्सेंट का था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर बीएसपी और कांग्रेस साथ चुनाव लड़ते तो नतीजे कुछ और हो सकते थे। अंत में नतीजा यह हुआ कि भाजपा इन तीनों राज्यों में सरकार बना ले गई।

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कर्नाटक चुनाव में भी मायावती ने कुछ ऐसा ही रास्ता अपनाया था और क्षेत्रीय पार्टियों से हाथ मिला लिया था। संभावित है कि अलग-अलग लड़ने पर वह इन तीनों राज्यों में कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है। कर्नाटक के अलावा गुजरात में भी कुछ ऐसा ही हुआ कि कांग्रेस राज्य में 20 सीटें लगभग 2000 वोटों से हारी और इन सभी सीटों पर बीएसपी को 2000 से ज्यादा वोट मिले।

2019 का संग्राम

मायावती ने दिग्विजय पर हमला करके 2019 के लिए कांग्रेस पर दबाव डालने का काम किया है। फिर भी संभावित ‘महागठबंधन’ की संभावनाओं पर अब कुछ बादल जरूर दिखाई पड़ने लगे हैं। हालांकि, माया ने सीधे-सीधे राहुल गांधी या सोनिया गांधी पर निशाना नहीं साधा, जिससे यह कहा जा रहा है कि उन्होंने 2019 के लिए दरवाजे खुले रखे हैं।

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