अब मायावती के समर्थन में उतरा यह बड़ा नेता, सियासी घमासान तेज

अब मायावती के समर्थन में उतरा यह बड़ा नेता, सियासी घमासान तेज



Lucknow. आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने दांव पेंच का खेल खेलना शुरू कर दिया है। राजनीति में मचे चुनावी घमासान में तब एक रोचक मोड़ आया जब यूपी सरकार ने दलितों के युवा नेता चंद्रशेखर उर्फ रावण को रिहा कर दिया है। रावण रिहाई के बाद से ही सियासत में भाजपा सरकार पर जहां विपक्षी दल हमलावर हैं। वहीं, बीजेपी सरकार भी सकते में है। वहीं, रावण भी खुलासे दर खुलासे कर रहे हैं।

यूपी की राजनीति में चार पहले भी एक रोचक मोड़ आया था, जब भीम आर्मी का गठन हुआ था। भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण का नाम चर्चा में तब आया जब सहारनपुर में हिंसा की घटनाएं हुईं। सहारनपुर में हिंसा भड़काने के आरोप में भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। सात सितम्बर, 2018 को योगी सरकार ने चंद्रशेखर को रिहा करने का आदेश दिया। बताया जा रहा है कि योगी सरकार ने चंद्रशेखर की मां की याचिका पर सरकार ने उसे रिहा किया है। हालांकि उसकी सजा में सिर्फ एक माह का वक्त बचा था।

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रिहाई के बाद से ही चंद्रशेखर उर्फ रावण ने मीडिया से बातचीत में कई खुलासे किये, जिससे राजनीति में घमासान मच गया है। रावण ने भारतीय जनता पार्टी पर करारा हमला बोला। रावण ने ​कहा कि भाजपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के डर से उनकी समय से पहले रिहाई करायी है। चन्द्रशेखर ने कहा कि भाजपा की ओर से उन्हें कैराना उपचुनाव में पेशकश की गई थी कि वह चुनाव लड़ें तो उन पर लगी रासुका हटा दी जाएगी।

जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि ये पेशकश किसने की थी तो रावण ने कहा कि याद करके बताऊंगा। इसके बाद पत्रकारों ने पूछा कि आप कैराना उपचुनाव के दौरान चुप क्यों थे तो उन्होंने कहा कि हम इसलिए चुप थे क्योंकि हमारी बुआ जी चुप थीं। रावण ने कहा कि भाजपा से किसी एक पार्टी का जीतना मुश्किल है ऐसे में विपक्ष को गठबंधन करना ही होगा।

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