यूपी में मायावती को इन नेताओं का मिला साथ तो भाजपा का हो जाएगा सूपड़ा साफ

यूपी में मायावती को इन नेताओं का मिला साथ तो भाजपा का हो जाएगा सूपड़ा साफ



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Lucknow. चुनाव की तारीख जैसे ही नजदीक आ रही है वैसे ही राजनीतिक दलों में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा ने उत्तर प्रदेश में अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। कांग्रेस, बसपा और सपा महागठबंधन की फिराक में हैं, लेकिन सीटों को लेकर पेंच फंसता नजर आ रहा है। माना जा रहा है कि इसलिए यूपी में अभी गठबंधन परवान नहीं चढ़ सका है। सूत्रों की मानें तो बसपा सूबे की सभी लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की फिराक में हैं। हालांकि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

उत्तर प्रदेश में बीते दिनों हुए लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में सपा और बसपा के गठबंधन के बाद भाजपा को काफी नुकसान हुआ था। गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा उपचुनाव मे सपा—बसपा गठबंधन को जीत मिली थी। इस जीत के बाद से ही आगामी चुनावों में बसपा और सपा गठबंधन के कयास लगाए जाने लगे हैं। इसके बाद कर्नाटक में कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री पद की शपथ समारोह में अखिलेश, मायावती, सोनिया समेत तमाम गैरभाजपाई दल एकजुट हुए थे। हालांकि अब तक गठबंधन को लेकर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी है।

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मीडिया रिपोर्टो की मानें तो यूपी में महागठबंधन को लेकर आए दिन खबरें देखने को मिलती हैं। लेकिन शीर्ष नेताओं से अभी तक कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। हालांकि माना जा रहा है कि सूबे में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती पशोपेश में फंसी हुई हैं, क्योंकि मायावती की नजर 2022 के चुनाव पर भी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती अपने परम्परागत वोट बैंक दलित पर नजर बनाए हुई हैं। साथ ही मुसलमानों और पिछड़ों को अपने पक्ष में करने की कवायद में भी लगी हुई हैं। बसपा सूत्रों का मानना है कि समाजवादी पार्टी से गठबंधन होने से कहीं उनका वोटर न खिसक जाए, क्योंकि समाजवादी पार्टी भी मुसलमानों और पिछड़ों पर नजर बनी हुई हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में कांग्रेस और सपा ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था, जिससे सपा सिमटकर बमुश्किल 47 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी। ऐसे में मायावती फूंक—फूंक कर कदम रख रही हैं। मायावती को डर सता रहा है कि कहीं गठबंधन के बाद उनका वोट खिसक न जाए। वहीं, मायावती भी गठबंधन को लेकर शर्त रख चुकी हैं। मायावती ने एक सार्वजनिक सभा में कहा ​था कि जब तक सम्मानजनक सीटें नहीं मिली तब तक गठबंधन नहीं हो सकता है। तो ऐसे में माना जा रहा है कि मायावती सीटों को लेकर ज्यादा समझौता करने के पक्ष में नहीं हैं।

यही नहीं, यूपी में गठबंधन को लेकर गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने तो मायावती को अपनी बहन बताकर चुनाव में उनका साथ देने का ऐलान कर दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने बसपा के धुर विरोध में उभरी भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर उर्फ रावण को भी साथ लाने का दावा कर दिया है। जिग्नेश ने कहा था कि मायावती उनकी बहन हैं। मोदी से उनका कोई सम्बंध नहीं है। मैं और चंद्रशेखर मायावती के दायें और बायें हाथ हैं। हम दोनों साथ खड़े हो गए तो बीजेपी का कहीं पता भी नहीं चलेगा। हालांकि, अभी बसपा या भीम आर्मी ने एक साथ आने का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है लेकिन बीजेपी के खिलाफ दलित वोटों का बिखराव रोकने के लिए इस तरह की कोशिशें तेज हो गई हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यूपी में भीम आर्मी और बसपा एकजुट हो गई तो भाजपा के लिए मुसीबत का सबब बन सकती है।

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