पश्चिमी यूपी के लिए मायावती ने नियुक्त किए 'दूत', ये है खास प्लान

पश्चिमी यूपी के लिए मायावती ने नियुक्त किए ‘दूत’, ये है खास प्लान



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Lucknow. आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर फोकस कर रही है। इसे देखते हुण् अन्य राजनीतिक दलों ने भी अपनी नजरें गड़ा दी हैं। बहुजन समाज पार्टी ने अपने राजनेताओं (दूत) को पश्चिमी यूपी पर कड़ी नजर रखने वहां भेज दिया है, जल्द ही वह बसपा सुप्रीमो मायावती को वहां का हाल बताएंगे यानि रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद बसपा अपने नेताओं का जाल बिछाना शुरू कर देगी।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजनीतिक दलों के लिए अहम क्षेत्र है, यहां सभी राजनीतिक दलों की नजरें लगी हुई हैं। बसपा प्रमुख मायावती यहां अपने सिपहसालारों को ग्राउंड रिपोर्ट लेने के लिए भेजेंगी। बताया जा रहा है कि बसपा प्रदेश अध्यक्ष हर मंडल में दो दिन बिताएंगे और पार्टी के पक्ष में मौजूदा माहौल की थाह लेंगे। साथ ही वह संगठन के लोगों से खुली चर्चा कर भाजपा की बनाई रणनीति की काट का खाका तैयार करेंगे। माना जा रहा है कि बसपा का का मसकद दलित, मुस्लिम और पिछड़ों को साधने पर रहेगा।

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पिछले दिनों बसपा के प्रदेश अध्यक्ष आरएस कुशवाहा ने कुछ जिलों में बूथ स्तर की मजबूती परखने के लिए लिए डेरा डाला था। इस बार वह पश्चिमी यूपी के हर मंडल के जिलों में दो-दो दिन रुकेंगे। बीएसपी सूत्रों की मानें तो कुशवाहा एक और दो सितंबर को आगरा मंडल में रहेंगे। तीन और चार को अलीगढ़ मंडल में, छह और सात को बरेली मंडल में, आठ और नौ को मुरादाबाद मंडल में, 13 और 14 सितंबर को मुजफ्फरनगर में, 15 और 16 सितंबर को मेरठ मंडल में रहेंगे। दोनों दिन बूथ और सेक्टर स्तर तक के कार्यकर्ताओं के बीच रहेंगे। प्रदेश अध्यक्ष वेस्ट यूपी के बाद 17 से 29 सिंतबर तक आजमगढ़, बनारस, भदोही, झांसी, चित्रकूट, कानपुर में भी इसी तरह वर्करों से चुनावी तैयारियों की थाह लेंगे।

बहुजन समाज पार्टी का पश्चिमी यूपी से खास लगाव है। बसपा यहां अक्सर मजबूत साबित हुई है। खुद पार्टी प्रमुख मायावती के सियासी सफर की शुरुआत पश्विमी यूपी से ही हुई थी। उन्होंने पहला चुनाव 1984 में कैराना सीट से लड़ा था। कैराना के चुनाव में उन्हें 45 हजार वोट मिले थे और वह हार गई थीं। 1985 में बिजनौर लोकसभा सीट के उपचुनाव और 1987 में हरिद्वार (अविभाजित यूपी के रहते) से उपचुनाव लड़ा और हार गईं। मायावती 1989 में लोकसभा चुनाव में बिजनौर से सांसद बनी। 1996 और 2002 में वह सहारनपुर जिले की हरौड़ा (अब सहारनपुर देहात) सीट से एमएलए बनीं और सीएम की शपथ ली। 2007 में वेस्ट यूपी से सबसे ज्यादा विधायक बीएसपी के जीते थे। इसी के साथ मायावती का जन्मस्थल गौतमबुद्ध नगर में है और ननिहाल हापुड़ जिले में।

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बता दें कि पश्चिमी पी पर सभी दलों का खास जोर हैं। भाजपा ने इसी माह यहां दो दिन की प्रदेश कार्यसमिति करके चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया है। सपा लगातर वेस्ट में हो रहे क्राइम, खासकर महिलाओं से साथ घटित अपराध को लेकर मुखर है। आरएलडी किसानों, गांव और गरीब की बात को लेकर सड़कों पर है। कांग्रेस भी तिंरगा मार्च, बाइक रैली निकलाकर आमजन से जुड़ने की कोशिश कर रही है।

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