मायावती और अखिलेश में गठबंधन की भूमिका तय, बस इसका है इंतजार

मायावती और अखिलेश में गठबंधन की भूमिका तय, बस इसका है इंतजार



Lucknow. आगामी लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को रोकने के लिए यूपी में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी में गठबंधन तय माना जा रहा है। दरअसल, लोकसभा उपचुनाव फूलपुर और गोरखपुर के नतीजे आने के बाद से ही तय हो गया था कि गठबंधन तय है। अखिलेश यादव मुबारकबाद देने के बहाने मायावती से मिलने इसलिए पहुंचे थे, ताकि रिश्तों पर जमी बर्फ कुछ पिघल जाए, लेकिन उसके बाद से अब तक दोनों नेताओं में न तो कोई मुलाकात हुई न ही कोई गठबंधन पर बातचीत हुईख्त्मा ऐसे में दोनों दलों के कार्यकर्ता भी पशोपेश में हैं।

गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनावों में सपा—बसपा गठबंधन के बाद भारतीय जनता पार्टी की बुरी तरह से हार हुई थी। सपा—बसपा की जीत के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बसपा प्रमुख मायावती से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद से ही आगामी चुनावों में गठबंधन को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन दोनों नेताओं की ओर से उसके बाद वन-टु-वन कोई मुलाकात नहीं हुई। हालांकि मई में कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के मौके पर जरूर दोनों नेताओं ने मंच जरूर साझा किया था।

वहीं, राजनीतिक दलों और इन दिग्गज नेताओं की पार्टी के नेताओं के भीतर यह जानने की उत्सुकता बढ़ती जा रही है कि आखिर गठबंधन को लेकर क्या चल रहा है? अगर सपा—बसपा गठबंधन होता है तो उसकी तस्वीर क्या होगी? दोनों दलों के नेताओं को चिंता सता रही है कि आखिर गठबंधन होने पर गठबंधन का नेता कोैन होगा या गठबंधन को लेकर आगे बातचीत क्यों नहीं हो रही है। नेताओं का मानना है कि आखिर कहां पर बात अटकी हुई है, जो दोनों दलों को पीछे खींच रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा सुप्रीमो मायावती 2017 में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन को भी देख रही हैं कि चुनाव के बाद वैसी स्थिति न हो जाए है। वहीं, मायावती का मानना है कि अगर गठबंधन मौके पर नहीं हुआ तो स्थिति और खराब हो सकती है। ऐसे में व​ह अभी पशोपेश में दिखाई दे रही हैं। हालांकि भारतीय जनता पार्टी गठबंधन को लेकर सतर्क हो गई है।

यह भी पढ़ें … राहुल गांधी ने इन आठ नेताओं को सौंपी बड़ी कमान, भाजपा में मचा हड़कम्प

भाजपा का मानना है कि मायावती प्रधानमंत्री पद की दावेदार के रूप में भी शामिल हो सकती हैं। ऐसे में मायावती को लगता है कि अपनी पुख्ता उम्मीदवारी के लिए भविष्य में पता नहीं किससे गठबंधन करना पड़ जाए। ऐसे में बसपा जल्द से जल्द समाजवादी पार्टी से गठबंधन को करना चाहती हैं, लेकिन वह सभी विकल्पों को खुला रखना चाह रही हैं।

वहीं, अखिलेश यादव अभी बसपा के साथ सीटों पर बातचीत करने से बचना चाहते हैं। हालांकि कई मौकों पर उन्होंने कहा ​है ​कि भाजपा को रोकने के लिए अगर सीटों की भी कुर्बानी देनी पड़े तो वह पीछे नहीं हटेंगे। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर मतभेद नहीं होने की संभावना है। वहीं, दोनों दलों के नेताओं का मानना है कि अगर गठबंधन के फैसले पर लेट—लतीफी ज्यादा हुई तो गठबंधन में सीटों का पेंच फंस सकता है। तो ऐसे में दोनों दलों में समायोजन कैसे हो पाएगा।

यह भी पढ़ें … बसपा ने रक्षाबंधन को लेकर किया ये बड़ा ऐलान, विरोध में उतरी भाजपा महिला मोर्चा

वहीं, कुछ अन्य पार्टी नेताओं का मानना है कि बसपा प्रमुख मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव गठबंधन को लेकर बेफिक्र हैं। माना जा रहा है कि दोनों दल यह मानकर चल रहे हैं कि भाजपा को रोकने के लिए गठबंधन जरूरी है। भारतीय जनता पार्टी को अभी नहीं रोका गया तो आगामी चुनावों में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में दोनों में अभी गठबंधन को लेकर जल्द ही दोनों दल फैसला ले सकते हैं और आगे की रणनीति भी साफ हो सकती है।

यह भी पढ़ें … अखिलेश यादव ने कर दिया ये बड़ा ऐलान, भाजपा में मची खलबली


You may also like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *