मायावती ने किया संगठन में बड़ा फेरबदल, इन छह नेताओं को सौंपी सूबे की जिम्मेदारी

मायावती ने किया संगठन में बड़ा फेरबदल, इन छह नेताओं को सौंपी सूबे की जिम्मेदारी



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New Delhi. आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने संगठन को मजबूत करने का फैसला लिया है। मायावती किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं छोड़ना चाहती है। बसपा सुप्रीमो ने एक बाद फिर संगठन में बड़ा बदलाव किया है। कई नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

यूपी में 2012 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद से ही बहुजन समाज पार्टी लगातार अपने अस्तित्व को लेकर जूझ रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर ने बसपा का पूरी तरह से सफाया कर दिया था। लिहाजा बहुजन समाज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। वहीं, 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा को मात्र 1़9 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इसके बाद वर्ष 2018 में हुए उपचुनावों में बसपा ने गठबंधन का सहारा लिया। बसपा और सपा गठबंधन ने लोकसभा उपचुनाव में दोनों सीटें गोरखपुर और फूलपुर अपनी झोली में डाली थी और भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया था।

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इसके बाद कैराना और नूरपुर में हुए उपचुनावों में भी भाजपा को दोनों सीटें गंवानी पड़ी थीं। इसी के बाद से बसपा कार्यकर्ताओं में फिर से जोश देखने को मिल रहा है। वहीं, मायावती भी लगातार संगठन को मजबूत करने में लगी हुई हैं। मायावती ने निर्देश दिया, सितंबर से पहले पार्टी प्रदेश में सभी बूथों पर अपने एजेंटों की नियुक्ति कर ले। इतना ही नहीं सेक्टर और ब्लॉक लेवल पर भी चुनावी टीम इस अवधि के अंदर तैयार ली जाए। सितंबर के पहले या दूसरे हफ्ते में छग बसपा के छह प्रभारी तीसरी समीक्षा बैठक करेंगे। हालांकि इससे पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ उनकी बैठक की संभावना भी है।

गहुजन समाज पार्टी ने चुनाव के मद्देनजर संगठन में बड़ा बदलाव किया है, जिसके बाद प्रदेश को चार जोन में बांटा गया है। पहले पार्टी पांच जोन के आधार पर चुनाव लड़ती रही हैं। जोन एक में रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, जांजगीर को रखा गया है। जबकि जोन दो में कोरबा और सरगुजा की लोस और विस सीटें हैं। जोन तीन में महासमुंद, दुर्ग, राजनांदगांव और जोन चार में बस्तर,कांकेर की सीटें रखी गई है। इसी के मुताबिक पार्टी चुनावी गतिविधियां संचालित करेगी। चारों जोन में प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ स्थानीय पदाधिकारी भी होंगे। वहीं जोन की टीम की मॉनिटरिंग प्रदेश प्रभारियों के जिम्मे होंगी। बसपा के फिलहाल छह प्रदेश प्रभारी हैं। सितंबर के पहले या दूसरे हफ्ते में तीसरी समीक्षा बैठक होगी। जिसमें प्रदेश प्रभारी संगठन के स्तर पर दिए गए निर्देश के आधार पर हुए कामों की प्रगति का रिव्यू करेंगे। कार्यकर्ताओं को सभी 90 सीटों पर तैयारियां करने के लिए कहा है।

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विधानसभा के साथ लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर फोकस करने को कहा गया है। पहले बसपा जिलावार विधानसभा सीटों के आधार पर तैयारियां करती थी। लेकिन इस बार लोकसभा क्षेत्र में आने वाली सीटों के मुताबिक चुनाव की रणनीति बनाई जाएगी। प्रभारियों ने कहा कि अब इसी पैटर्न पर तैयारियां करना है।

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