पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई का गोला से था गहरा नाता

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई का गोला से था गहरा नाता



मन्दीप कुमार वर्मा

गोला गोकर्णनाथ, खीरी। देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री अटल बिहारी बाजपेई का लखीमपुर जिले से गहरा रिश्ता रहा था, जो कई बार गोला आकर रात्रि विश्राम कर चुके थे। श्री बाजपेई की एक ओर नगर के प्रमुख समाजसेवी से मित्रता, दूसरी ओर एक निकटवर्ती ग्राम में रिश्तेदारी भी थी।

लखीमपुर जिले के उपनगर गोला गोकर्णनाथ में देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेई का शहर के प्रमुख समाजसेवी, भारत भूषण अग्रवाल राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के कददावर सिपाही होने के कारण दोनों लोगों में घनिष्ठता थी। जिसके चलते वह कभी राजनीतिक तो कभी व्यक्तिगत सम्बन्धों के कारण उनका अक्सर गोला आगमन हुआ करता था। वहीं श्री बाजपेई की भांजी मंजुला मिश्रा का विवाह नगर के निकटवर्ती ग्राम जडौरा निवासी प्रमोद कुमार मिश्र के साथ वर्ष 1969 में हुआ था। जिसके कारण उनका जिले व निकटवर्ती जिलों में आगमन होता था तो वह यहां आकर रूकते थे, समाजसेवी वरूण अग्रवाल बताते है कि जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई गोला आते तो वह अपनी भांजी के यहां न रूक हमारे पिता के साथ रूकते थे और उनका स्वभाव सादा और सरल था कि घर में जो खाना बना होता था वहीं खाने के लिये कहते थे।

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पूरे परिवार में ऐसे घुलमिल जाया करते थे कि लगता ही नहीं था कि वह कोई खास वीआईपी व्यक्ति हैं। श्री अग्रवाल ने बताया कि अटल जी के घर आने पर पूरे घर में खुशी की लहर दौड जाती थी और वह रात को पिता जी के साथ घंटो धारा प्रवाह देश के राजनीतिक परिदृश्य को लेकर बहस हुआ करती थी। वरूण अग्रवाल कहते है कि श्री बाजपेई के विचारों से प्रभावित होकर समाजसेवा से जुडे। जबकि बाजपेई की भांजी का वर्ष 2011 में मंजुला मिश्रा का निधन हो चुका है।

राजनीतिक परिदृश्य सुन मिली समाजसेवा की प्रेरणाः वरूण

समाजसेवी वरूण अग्रवाल ने श्री बाजपेई के निधन पर दुःख व्यक्त करते हुये कहा कि राजनीतिक परिदृश्य को लेकर जब स्व. श्री अटल बिहारी बाजपेई से उनके पिता की धारा प्रवाह होती थी तो हम उसे बहुत ध्यान से सुनते थे और उसे सुन समाजसेवा की भावना जागृत हुई। श्री बाजपेई जी कड़े संघर्ष और चुनौतियों के बाद वह प्रधानमंत्री के पद पर पहुंचे। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्हें हर कदम पर कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अपने शासनकाल में वाजपेयी ने तुच्छ राजनीतिक हितों को साधने के बजाय देश के विकास के लिए कार्यक्रमों पर अमल को प्राथमिकता दी। कम ही समय में उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जिससे जनता को लंबी अवधि तक लाभ मिला। इसलिए हम सभी को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। जिन्होंने सदा निस्वार्थ भाव से कार्य कर अपना जीवन देश को समर्पित किया।

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