बसपा के लिए बड़ी खबर: लोकसभा चुनाव से पहले इन बड़े दलित नेताओं का भी मिला साथ

बसपा के लिए बड़ी खबर: लोकसभा चुनाव से पहले इन बड़े दलित नेताओं का भी मिला साथ



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Lucknow. लोकसभा चुनाव 2014 और विधानसभा चुनाव 2017 में बहुजन समाज पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद बसपा ने 2018 के उपचुनावों में एक प्रयोग के तौर पर समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया था तो भाजपा का पत्ता साफ हो गया है। इसके बाद बसपा ने कैराना और नूरपुर में भी सपा को बाहर से समर्थन किया था, ​जिसमें भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। इस सफल गठबंधन के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती आगामी लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की ओर रुख करने का मन बना लिया है।

आगामी लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर राजनीतिक दलों ने रणनीतियां बनानी शुरू ​कर दी हैं। भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए गैरभाजपाई दल महागठबंधन का सहारा लेने का मन बना चुके हैं। गठबंधन के केंद्र में बसपा प्रमुख मायावती का नाम काफी उभर रहा है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के बाद अब अन्य नेताओं ने भी मायावती से गठबंधन करने की रणनीति बनानी शुरू कर दी है। महागठबंधन की कोशिशों के बीच वे दलित क्षत्रप भी बसपा के करीब आने लगे हैं, जो कभी मायावती के लिए सिरदर्द बने हुए थे।

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गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने तो मायावती को अपनी बहन बताकर लोकसभा चुनाव में उनका साथ देने का ऐलान कर दिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने बीएसपी के धुर विरोध में उभरी भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर उर्फ रावण को भी साथ लाने का दावा किया है। हालांकि, अभी बीएसपी या भीम आर्मी ने एक साथ आने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खिलाफ दलित वोटों का बिखराव रोकने के लिए इस तरह की कोशिशें तेज हो गई हैं।

2014 के लोकसभा और 2017 में यूपी विधानसभा चुनावों के वक्त अकेले चुनाव मैदान में उतरी बीएसपी की मुश्किलें बढ़ती गईं। जहां एक ओर लोकसभा चुनाव में उसे एक भी सीट नहीं मिली और विधानसभा में मात्र 19 सीटों पर सिमट गई। इसके बाद मायावती ने गठबंधन की राजनीति का ऐलान किया। मायावती ने उपचुनावों में समाजवादी पार्टी (एसपी) का साथ देकर एक प्रयोग किया, जो सफल भी रहा। गोरखपुर, फूलपुर में एसपी का सीधे समर्थन दिया, तो कैराना और नूरपुर में भी बीएसपी का अप्रत्यक्ष समर्थन समाजवादी पार्टी के साथ ही रहा। नतीजा यह हुआ कि बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिली।

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इस प्रयोग के बाद मायावती अब लोकसभा चुनाव के लिए महागठबंधन के मिशन में जुट गई हैं। इस मिशन के तहत वह अपने 21 फीसदी वोटों की ताकत दिखाकर ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करने की जुगत में लगी हुई हैं। दरअसल, बीएसपी सुप्रीमो मायावती मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का साथ देकर लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अपनी नींव मजबूत करने में लगी हुई हैं।

बता दें कि गुजरात के दलित नेता जिग्नेश मेवाणी के रुख में अचानक हुआ बदलाव मायावती के लिए राहत की बात है। सूत्रों का कहना है कि यह कांग्रेस से मायावती की करीबी का भी असर हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में एक दलित सम्मेलन में जिग्नेश ने कहा कि मायावती मेरी बहन हैं। मोदी से उनका कोई संबंध नहीं है। मैं और चंद्रशेखर, मायावती के दाएं और बाएं हाथ हैं। हम दोनों साथ खड़े हो गए तो बीजेपी का कहीं पता भी नहीं चलेगा।’

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