बड़ी खबरः चुनाव से पहले मायावती ने एक और दिग्गज नेता को पार्टी से निकाला, मचा हड़कम्प

बड़ी खबरः चुनाव से पहले मायावती ने एक और दिग्गज नेता को पार्टी से निकाला, मचा हड़कम्प



Lucknow. आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में घमसान शुरू हो चुका है। राजनीतिक दलों के नेता अपनी—अपनी पैठ बनाने में लगे हुए हैं। टिकटों को लेकर पार्टी कार्यालयों के चक्कर लगाने लगे हैं। वहीं, राजनीतिक दल संगठनों को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती सत्ताधारी दल को कड़ी टक्कर देने के लिए संगठन में कोई हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं कर रहीं हैं। पार्टी हित में बड़े फैसले भी लेने से नहीं चूक रही हैं।

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने चुनाव से पहले एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने मध्यप्रदेश प्रभारी और समन्वयक भूपेंद्र मौर्या को पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित कर दिया है। दो माह में मायावती ने अपनी पार्टी के दो खास लोगों को निष्कासित किया है। मध्यप्रदेश में मुख्य जोन इंचार्ज लालाराम अहिरवार के मुताबिक बसपा में अनुशासनहीनता करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अहिरवार के मुताबिक बसपा सुप्रीमो के आदेश पर भूपेंद्र मौर्या को पार्टी से निकाल दिया गया है। पार्टी में अनुशासन ही सर्वोपरि है। मध्यप्रदेश में चुनाव से पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने बड़ा फैसला करते हुए अपने प्रदेश अध्यक्ष नर्मदाप्रसाद अहिरवार, राजाराम और महेश के खिलाफ धारा 354, 506 और 34 के तहत प्रकरण दर्ज किया था।

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तीन दिन पहले ही पार्टी अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद अहिरवार पर बसपा की ही सदस्य एक महिला नेता के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा था। प्रदेश अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद अहिरवार समेत पार्टी कार्यालय सचिव राजाराम जाटव और महेश प्रसाद कुशवाहा भी आरोपी बनाए गए थे। इसके बाद एफआईआर भी दर्ज हो गई थी। इसके बाद भोपाल जोन के प्रभारी प्रदीप अहिरवार अब नए प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। बहुजन समाज पार्टी का विंध्य, बुंदेलखण्ड और ग्वालियर-चंबल संभाग के 14 जिलों में प्रभाव है। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा चार सीटों पर चुनाव जीती थी। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में 62 सीटें ऐसी रहीं जहां बसपा प्रत्याशी ने 10 हजार से ज्यादा और 17 सीटों में 30 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। इसी ताकत के बल पर कांग्रेस पार्टी बसपा से गठबंधन चाहती है।

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मध्यप्रदेश में कांग्रेस-बसपा और सपा के साथ गठबंधन बनाने की कवायद चल रही है। कांग्रेस तो प्रस्ताव दे चुकी है, बसपा और सपा फिलहाल इंतजार कर रहे हैं। हालांकि मायावती ने भी पिछले दिनों संकेत दे दिए थे कि यदि हमें सम्मानजनक सीटें दी जाएंगी तो हम साथ देंगे, अन्यथा हम अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं और सक्षम हैं। बता दें कि चुनाव से पहले मध्यप्रदेश में कई पार्टियों के भीतर भी घमासान चल रहा है। हर पार्टी भाजपा सरकार को किसी भी प्रकार से जड़ से उखाड़ फेंकने की कोशिशों में लगी हैं।

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