अखिलेश सरकार के मुकाबले योगी सरकार फ्लॉप!

अखिलेश सरकार के मुकाबले योगी सरकार फ्लॉप!



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Lucknow. प्रदेश की योगी सरकार को ताजा जारी आंकड़ों से करारा झटका लगा है। प्रदेश में पूर्ववर्ती अख्रिलेश सरकार के मुकाबले योगी सरकार फ्लाप साबित हो रही है। दरअसल, सूचना के अधिकार के तहत स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एससीआरबी) से मिले आंकड़े महिला सुरक्षा समेत कानून व्यवस्था के मुद्दे पर प्रदेश सरकार को फ्लॉप साबित कर रहे हैं।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था बेहतर होने की बात कहते नहीं थकते हैं। वहीं, आरटीआई से मिले आकंडे बताते हैं कि कड़क छवि वाले वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ के समय में कानून व्यवस्था की हालात पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समय के मुकाबले 7 गुने से भी ज्यादा बदतर हो गई है और सूबे में दहेज हत्या, दुष्कर्म, छेड़छाड़ व महिला उत्पीडऩ के मामले तेजी से बढ़े हैं।

दरअसल सामाजिक कार्यकर्ता संजय शर्मा की एक आरटीआई अर्जी पर बीती 27 जुलाई को सूबे के राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो के सहायक जन सूचना अधिकारी ने जो जानकारी दी उसके आंकडे खुलासा करते हैं कि योगी सरकार के समय में महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों में पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के मुकाबले 725 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है।
सूचना के अनुसार सपा सरकार के कार्यकाल के 16 मार्च 2012 से 15 मार्च 2017 तक के 5 वर्ष यानि कि 1826 दिनों में सूबे में दहेज़ हत्या के 11449, बलात्कार के 13981,शीलभंग के 36643,अपहरण के 48048, छेड़खानी के 4874, महिला उत्पीडन के 51027 और पास्को के 13727 अभियोग पंजीकृत हुए थे।

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जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के कार्यकाल में 16 मार्च 2018 से 30 जून 2018 तक के 107 दिनों में सूबे में दहेज़ हत्या के 3435, बलात्कार के 5654,शीलभंग के 17249,अपहरण के 21077, छेड़खानी के 1410, महिला उत्पीडन के 20573 और पास्को के 7018 अभियोग पंजीकृत हुए हैं। संजय ने बताया कि इस प्रकार अखिलेश यादव के समय 826 दिनों में सूबे में महिलाओं के खिलाफ विभिन्न श्रेणियों के कुल 179749 अपराध हुए जबकि वर्तमान मुख्यमंत्री योगी के समय 107 दिनों में ही सूबे में महिलाओं के खिलाफ विभिन्न श्रेणियों के कुल 76416 अपराध घटित हो गए हैं।

संजय बताते है कि एससीआरबी द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताकि अखिलेश के समय में दहेज़ हत्या के 7 से कम मामले प्रतिदिन दर्ज हो रहे थे, जो सीएम योगी के समय में 5 से अधिक गुना बढ़कर 32 से अधिक मामले प्रतिदिन पर आ गए हैं।
अखिलेश के समय में 8 से कम बलात्कार प्रतिदिन हो रहे थे जो अब 6 से अधिक गुना बढ़कर 52 से अधिक मामले प्रतिदिन हो गए हैं। जहां अखिलेश के समय में शीलभंग के मामले प्रतिदिन 21 से कम हो रहे थे, वहीं वर्तमान सरकार में 8 से अधिक गुना बढ़कर 161 से अधिक मामले प्रतिदिन पर आ गए हैं।

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इसी प्रकार सपा सरकार में हर रोज 27 से कम अपहरण के मामले होते थे, जो इस वक्त 7 से अधिक गुना बढ़कर 196 से अधिक मामले प्रतिदिन हो गए हैं। जहां अखिलेश के समय में 3 से कम छेड़खानी के मामले प्रतिदिन हो रहे थे जो योगी के समय में 4 से अधिक गुना बढ़कर 13 से अधिक मामले प्रतिदिन हो गए हैं । अखिलेश के समय में 28 से कम महिला उत्पीडन के मामले प्रतिदिन हो रहे थे जो योगी के समय में 6 से अधिक गुना बढ़कर 192 से अधिक मामले प्रतिदिन हो गए हैं।

सर्वाधिक घृणास्पद हाल तो नाबालिगों के साथ है, जहां अखिलेश सरकार में पास्को कानून के तहत 8 से कम प्रतिदिन की दर से दर्ज होते थे। वहीं योगी सरकार में बच्चो के साथ होने वाले अपराध 8 से अधिक गुना बढ़कर 65 से अधिक मामले प्रतिदिन हो गए हैं। आकड़ों को देखा जाए तो सपा सरकार में महिलाओं के खिलाफ सभी श्रेणियों के 99 से कम अपराध प्रतिदिन घटित हुए। जबकि अब योगी सरकार में महिलाओं के खिलाफ सभी श्रेणियों में अपराध 7 से अधिक गुना बढ़कर 714 अपराध प्रतिदिन पर आ गए हैं।

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संजय कहते हैं कि इन सरकारी आंकड़ों से साफ है कि सूबे में महिलाओं के प्रति होने वाले सभी श्रेणियों के अपराधों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हो रही है जो क चिंताजनक है। उन्होंने ानून व्यवस्था की गिरती स्थिति के लिए पुलिस अधिकारियों की पोस्टिंग्स में क्षमता की जगह भाई-भतीजाबाद, भ्रष्टाचार, जातिवाद, क्षेत्रवाद आदि को तरजीह देने की कुनीति को जिम्मेदार ठहराया है। बकौल संजय अगर सीएम योगी अब भी न चेते तो संभव है कि 2019 में भाजपा का विजय रथ दिल्ली पहुचने से पहले यूपी में ही रुक जाए।


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