चुनाव 2019: भाजपा की नजर बसपा पर, मायावती बन सकती हैं उप प्रधानमंत्री

चुनाव 2019: भाजपा की नजर बसपा पर, मायावती बन सकती हैं उप प्रधानमंत्री



Share on FacebookTweet about this on TwitterShare on Google+Pin on PinterestShare on LinkedIn

Lucknow. आगामी लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुटे हुए हैं। विपक्षी दल भाजपा को हराने के लिए महागठबंधन बनाने की जुगत में है, तो भाजपा सत्ता वापसी का दावा कर रही है। पर, ​यूपी में बीते दिनों हुए लोकसभा उपचुनाव में गोरखपुर, फूलपुर औ कैराना में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा था। कारण, मायावती का समाजवादी पार्टी को खुला समर्थन देना माना जा रहा था।

लोकसभा उपचुनावों के बाद से ही मायावती की लोकप्रियता में बढ़ोतरी देखने को मिली है। उपचुनावों के बाद से ही मायावती आगामी चुनाव के लिए केंद्र बिन्दु बनकर उभर रही हैं। आए दिन मायावती से गठबंधन को और सपा और कांग्रेस लगातार दावे कर रही है, लेकिन इस बीच जो खबर आई है वो काफी चौकाने वाली है। शायद आपको विश्वास नहीं होगा, लेकिन यह सच भी साबित हो सकता है। कारण जानने के लिए पूरी खबर जरूर पढ़ें।

यह भी पढ़ें … लोकसभा चुनाव: …तो इसलिए मायावती हैं पीएम पद के लिए मजबूत दावेदार

आगामी लोकसभा और मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में होने वाले चुनावों में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस आए दिन बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन करने के ​लिए लगा हुआ है, क्योंकि इन राज्यों में मायावती का परंपरागत दलित वोट बैंक उनके साथ नजर आ रहा है और बीते चुनावों में बसपा को अच्छा प्रदर्शन भी रहा है। ऐसे में भाजपा को अपनी जमीन खिसकती दिखाई दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और अन्य नेता लगातार अभी से चुनाव अभियान में जुट गए हैं। इसके साथ ही आरएसएस भी स​​क्रिय हो गया है।

सूत्रों का मानें तो भाजपा और आरएसएस के नेता बहुजन समाज पार्टी को अपने खेमे में लाने के लिए जुट गए हैं। माना जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व मायावती को उप प्रधानमंत्री पद का आफर भी कर सकता है। जानकार बताते हैं कि बहुजन समाज पार्टी को अपने तमाम छिपे एजेंडे साधने के लिए सत्ताधारी दल के साथ जाना ज्यादा मुनासिब होगा। कांग्रेस की स्थिति को देखते हुए बसपा को अब भी उसके सत्ता में वापसी का विश्वास नहीं हो पा रहा है। वैसे भी बहुजन समाज पार्टी जब-जब भाजपा के साथ आई है, उपलब्धियां ही अर्जित की हैं। बार-बार सत्ता का स्वाद चखने को मिला है। उसे नुकसान कभी नहीं हुआ।

संघ का मिशन हिंदुत्व भी होगा मजबूत

बसपा के साथ आने से भाजपा का सत्ता में पुनः वापसी का रास्ता साफ होगा। वहीं संघ का मिशन हिंदुत्व भी मजबूत होगा। मायावती के साथ आने से भाजपा को उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश भर में लाभ मिलेगा। महाराष्ट्र, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भाजपा के पास दलितों के बड़े चेहरे हैं। मायावती के पास दलित समाज को भाजपा के साथ जुड़ने को तार्किक ढंग से बताने को बहुत कुछ है। मायावती दलित समाज को बताएंगी कि दलित समाज के उत्थान को लेकर बसपा ने जो सोचा था, मोदी उसे आगे बढ़ा रहे हैं। दलित महापुरुषों पर जितना काम मोदी ने किया उतना कोई सरकार नहीं कर पाई। भाजपा हमेशा आरोप लगाती रही है कि कांग्रेस ने ऐसे महापुरुषों को पीछे ही रखा है। मोदी ने अंबेडकर से जुड़े स्थलों को पंचतीर्थ घोषित किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने भी आंबेडकर की फोटो सभी सरकारी दफ्तरों में रखने की अनिवार्यता कर दी है। यह सब यूं ही नहीं हो रहा। इसके पीछे सोची-समझी रणनीति काम कर रही है।

यह भी पढ़ें … सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में धांधली, एसटीएफ ने 51 को किया गिरफ्तार

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बहुजन समाज पार्टी का पिछले दिनों से जिस प्रकार से समाजवादी पार्टी के साथ व्यवहार देखने को मिला है, उससे साबित होता है कि मायावती समाजवादी पार्टी के साथ आसानी से नहीं जाएंगी। दरअसल, मायावती के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। इस वजह से उन्हें सपा और कांग्रेस की ओर जाने से रोक रही हैं। यही वजह है कि बीजेपी के रणनीतिकार मान रहे हैं कि बसपा को उनके साथ समझौता करने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एक बार फिर बसपा और भाजपा एक साथ होंगे। भाजपा नेतृत्व एक बार फिर विरोधियों को परास्त कर मोदी को देश के सिंहासन पर स्थापित कर पाएंगे। इस मामले में भाजपा अथवा संघ का कोई नेता कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। इस मामले में बसपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधींद्र भदौरिया से बात की गई तो उन्होंने बसपा की तरफ से ऐसी किसी कवायद की जानकारी होने से इनकार किया और कहा कि मामला बड़े स्तर का है। लिहाजा इस पर फिलहाल टिप्पणी करना उचित नहीं है।

यह भी पढ़ें … लोकसभा चुनाव: गठबंधन को लेकर समाजवादी पार्टी ने लिया ये बड़ा फैसला

अब सीटों के बंटवारे की भी बात आती है तो बसपा यूपी में ही नहीं पूरे देश में समझौते के तहत सीटें चाहेगी। इससे बसपा का लोकसभा में प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। राष्ट्रीय दल का दर्जा पुनः वापस हासिल कर सकेगी। बता दें कि गत लोकसभा चुनाव में मत प्रतिशत कम होने की वजह से बसपा का राष्ट्रीय दल का दर्जा खत्म हो गया था।


You may also like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *