पीएम मोदी ने युगांडा में पेश किए ये दस सिद्धांत

पीएम मोदी ने युगांडा में पेश किए ये दस सिद्धांत



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New Delhi. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि भारत ने अफ्रीका के साथ अपने सहयोग और साझेदारी को बढ़ाया है। इसके साथ ही उन्होंने अफ्रीकी देशों के साथ सहयोग के लिए भारत के 10 सिद्धांत पेश किए। मोदी ने युगांडा के संसद को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अफ्रीका का साझेदार बनकर गौरवान्वित महसूस करता है और युगांडा इस महादेश के प्रति हमारी प्रतिबद्धता के केंद्र में है। इस देश के संसद को पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने संबोधित किया है। उन्होंने युगांडा को कृषि, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, बुनियादी सुविधाएं, ऊर्जा, क्षमता निर्माण और रक्षा क्षेत्र में प्रशिक्षण को लेकर लगातार समर्थन देने का आश्वासन दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने अफ्रीका के विशाल विस्तार में हमारी साझेदारी और वचनबद्धता को और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि बीते चार वर्षो में, हमारे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और मैंने संयुक्त रूप से अफ्रीका के 25 देशों का दौरा किया है। हमारे मंत्रियों ने लगभग सभी अफ्रीकी देशों से संपर्क स्थापित किया है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बीते चार वर्षो में अफ्रीकी देशों के 32 राष्ट्राध्यक्षों ने भारत का दौरा किया है। मोदी ने सदन में युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी की मौजूदगी में कहा कि अफ्रीका के साथ भारत का सहयोग 10 सिद्धांतों के साथ आगे बढ़ता रहेगा।

1- अफ्रीका हमारी प्राथमिकताओं में शीर्ष पर बना रहेगा। हम लगातार हमारा सहयोग अफ्रीका के साथ मजबूत करते रहेंगे। जैसे कि हमने दिखाया है, यह निरंतर और नियमित रहेगा।

2-  भारत की विकास साझेदारी अफ्रीकी प्राथमिकताओं के साथ आगे बढ़ेगी, जिसके अंतर्गत अफ्रीकी प्रतिभा व कुशलता पर निर्भरता बनी रहेगी।
3-  हम अपने बाजार को खुला रखेंगे और व्यापार के लिए इसे सुलभ और आकर्षक बनाएंगे। हम हमारे उद्योग को अफ्रीका में निवेश करने के लिए सहयोग करेंगे।

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4-   भारत के डिजिटल क्रांति के अनुभव का प्रयोग अफ्रीका जन सेवाओं के प्रतिपादन में सुधार के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही यहां शिक्षा व स्वास्थ्य, डिजिटल साक्षरता, वित्तीय समावेशन और दबे व कुचले लोगों को मुख्यधारा में लाने के प्रयास किए जाएंगे।

5-  अफ्रीका के पास विश्व का 60 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि है, लेकिन वैश्विक उत्पादन में इसका योगदान केवल 10 प्रतिशत है। हम आपके साथ अफ्रीका के कृषि की दशा सुधारने के लिए काम करेंगे।

6-  जलवायु बदलाव की चुनौती से निपटने के लिए भारत-अफ्रीका साझेदारी है। हम अंतर्राष्ट्रीय जलवायु व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिसमें हमारे जैव विविधता को संरक्षित करना और स्वच्छ व दक्ष ऊर्जा स्रोतों को अपनाना शामिल है।

7-  दोनों देश आतंकवाद और अतिवाद से निपटने के लिए साझा क्षमता और सहयोग को मजबूत करेंगे।

8- हम महासागरों को खुले रखने के लिए अफ्रीकी देशों के साथ मिलकर काम करेंगे, जिससे सभी देशों को फायदा हो। दुनिया अफ्रीका के पूर्वी तट और पूर्वी हिंद महासागर के संबंध में सहयोग चाहती है न कि प्रतियोगिता।

9- दोनों पक्षों से मिलकर काम करने का आग्रह किया ताकि अफ्रीका एक बार फिर प्रतिद्वंद्वी महत्वाकांक्षाओं से न घिरे, बल्कि अफ्रीकी युवाओं के महत्वाकांक्षाओं के लिए एक नर्सरी बने।

10- भारत और अफ्रीका दोनों ने एक साथ औपनिवेशिक शासन का सामना किया है। हमें साथ मिलकर प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रितक वैश्विक व्यवस्था के लिए काम करना है, जो कि अफ्रीका और भारत में रह रहे एक तिहाई मानवता की आवाज है।

अब जाएंगे दक्षिण अफ्रीका

मोदी ने अफ्रीका के साथ विकास साझेदारी के बारे में भी बताया। भारत ने मौजूदा समय में 40 अफ्रीकी देशों के साथ 11 अरब डॉलर के 180 लाइंस ऑफ क्रेडिट को लागू किया है। उन्होंने कहा कि अंतिम भारत अफ्रीका सम्मेलन में, हमने अनुदान सहायता के रुप में 10 अरब डॉलर और 60 करोड़ डॉलर के रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट की प्रतिबद्धता जताई थी। उन्होंने साथ ही कहा कि भारत-अफ्रीका के व्यापार आंकड़े अब 62 अरब डॉलर तक पहुंच गए हैं, जोकि गत वर्ष के मुकाबले 21 प्रतिशत ज्यादा है। मोदी तीन अफ्रीकी देशों की पांच दिवसीय यात्रा के दूसरे चरण में मंगलवार को रवांडा से यहां आए थे। यहां के बाद वह दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर जाएंगे। गत 20 वर्षो बाद यहां किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने यात्रा की है।

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