अब अखिलेश और मायावती ने कांग्रेस के सामने खड़ा किया ये संकट!

अब अखिलेश और मायावती ने कांग्रेस के सामने खड़ा किया ये संकट!



Lucknow. प्रदेश में बीते 2017 के विधानसभा चुनावों में ‘यूपी के लड़के’, ‘काम बोलता है’ के नारों के साथ कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने गठबंधन किया था, लेकिन गठबंधन की करारी हार हुई थी। सत्ताधारी दल समाजवादी पार्टी की हार का कारण राजनीतिक हलकों में कांग्रेस से गठबंधन होना बताया जा रहा था। वहीं, गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपुचनावों के दौरान समाजवादी पार्टी ने बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन कर लिया था। इस गठबंधन को मिली अपार सफलता के बाद से ही समाजवादी पार्टी बसपा से गठबंधन को आगामी लोकसभा चुनावों तक बनाए रखना चाहती है। ऐसे में यूपी में सपा, बसपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर बंटबारे का पेंच फंस सकता है, जो कांग्रेस के लिएकिसी झटके से कम साबित नहीं होगा।

कर्नाटक विधानसभा चुनावों में जदएस के साथ गठबंधन कर कांग्रेस ने सरकार बनाई है। कांग्रेस अब कई राज्यों में 2018 में होने वाले चुनावों में भी छोटे दलों का सहारा लेकर सरकार बनाने की जुगत में जुटी है। इसके साथ लोकसभा चुनाव भी कांग्रेस के लिए चुनौती बना हुआ है। लोकसभा चुनावों में भी जीत ​हासिल करने के लिए कांग्रेस गैर भाजपाई दलों को गठबंधन में शामिल करने के लिए एड़ी—चोटी का जोर लगा रही है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने बिहार में नीतीश सरकार को महागठबंधन में फिर से शामिल होने का न्यौता दिया, लेकिन इस बीच विपक्षी एकता में सेंध लगती दिखाई दे रही है।

2019 में भाजपा के खिलाफ मोर्चा बनाने में लगी समाजवादी पार्टी ने यूपी में महागठबंधन बनाने की कवायद को झटका देने का संकेत दिया है। सूत्रों की मानें तो समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कांग्रेस को महागठबंधन में शामिल करने की इच्छुक नहीं है।

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बताया जा रहा है कि वह कांग्रेस को केवल रायबरेली और अमेठी की सीट देना चाहते हैं। माना जा रहा है कि यूपी में विधानसभा चुनाव के दौरान सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन नतीजा पक्ष में नहीं आया था। इसके बाद सपा-बसपा ने गोरखपुर और फूलपुर उप चुनावों के दौरान गठबंधन किया और भाजपा को उसके ही गढ़ में हरा दिया।

प्रदेश में राजनीतिक संकेत को समझते हुए अखिलेश ने बसपा से करीबी तो कांग्रेस से कन्नी काटना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव यूपी में पार्टी की दुर्गति के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन को ही जिम्मेदार मानते हैं।

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यही नहीं, बहुजन समाज पार्टी भी कांग्रेस के गठबंधन के मंसूबों पर पानी फेरते हुए नजर आ रही है। दरअसल, मध्यप्रदेश में 2018 के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनावों में बसपा ने अलग से लड़ने का फैसला लिया है। बसपा ने गठबंधन की खबरों को खारिज कर दिया है।

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