बड़ी खबर: मायावती उठा सकती हैं ये बड़ा कदम, जल्द करेंगी ऐलान!

बड़ी खबर: मायावती उठा सकती हैं ये बड़ा कदम, जल्द करेंगी ऐलान!



Lucknow. प्रदेश में हुए लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। गोरखपुर और फूलपुर उपचुनावों में सपा और बसपा ने गठबंधन किया था, जो सफल भी रहा। इसके बाद कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा उपचुनावों में भी बसपा ने पीछे से समर्थन किया था, जिसका सपा और रालोद को बड़ा फायदा मिला और भाजपा को हराकर सीटों पर कब्जा जमा लिया। उपचुनावों में मिली जीत के बाद अब कांग्रेस, सपा और बसपा के सहारे लोकसभा चुनावों में यूपी जीतने की फिराक में है। हालांकि मायावती की ओर से अभी कोई संकेत नहीं मिला है यानि अभी वो चुप हैं।

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को लेकर ​विपक्षी दल 2019 को देख कर गठबंधन की कोशिश में लगे हुए हैं, लेकिन मायावती अभी चुप्पी साधे हुई हैं। दरअसल पिछले छह साल से राजनीतिक हासिए पर पहुंच चुकी मायावती कोई भी कदम जल्दबाजी में नहीं उठाना चाह रही हैं। 2007 के चुनावों में बहुजन समाज पार्टी ने 206 सीटें जीत कर प्रदेश में सरकार बनाई थी, लेकिन 2012 के चुनावों में बसपा को सिर्फ 80 सीटें हासिल हुईं थी और समाजवादी पार्टी ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई थी। 2012 के चुनावों के बाद से ही मायावती लगातार राजनीति हासिए पर खिसकती रहीं।

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2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर के चलते बहुजन समाज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली थी। जबकि 2009 की बात की जाए तो बसपा को उत्तर प्रदेश में 20 सीटों पर जीत हासिल हुई थी, जबकि एक सीट मध्यप्रदेश से जीती थी। 2014 के चुनावों के बाद से ही पार्टी में तोड़—फोड़ मच गई थी। बसपा प्रमुख मायावती पर ही कई पार्टी नेताओं ने कांशीराम की पार्टी को खत्म करने और टिकट के नाम पर उगाही करने का आरोप लगाया था।

2014 के चुनावों के बाद से पार्टी उबर भी नहीं पाई थी कि 2017 में एक और बड़ा झटका लगा। बसपा के तमाम बड़े नेताओं ने पार्टी छोड़ना शुरू कर दिया, जिससे बसपा पूरी तरह से हासिए पर चली गई। 2017 के विधानसभा चुनावों में बसपा को मात्र 19 सीटें मिलीं। सबसे खास बात यह रही कि इधर बसपा हासिए पर थी और उधर भीम आर्मी का उदय हो गया। इससे राजनीतिक दलों को लगने लगा था कि बहुजन समाज पार्टी अब अंत होने वाला है, लेकिन कर्नाटक विधानसभा चुनाव और उपचुनावों में जीत से छोटे और बड़े दलों को अंदाजा हो गया कि बसपा का वोटबैंक अभी भी जोश में है।

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चुनावों में मिली जीत के बाद भाजपा विरोधी दलों ने बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती को लेकर बड़े—बड़े दांव चलने शुरू कर दिए। कांग्रेस जैसे बड़े दल को भी लगने लगा है कि छोटे दलों में बसपा ही ऐसी पार्टी है, जिसके सहारे 2019 की सत्ता को हासिल किया जा सकता है। कांग्रेस लोकसभा चुनावों से पहले कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों पर भी नजर बनाए हुए है। कांग्रेस मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बसपा का सहारा लेने की जुगत में है।

वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी गठबंधन को लेकर ऐलान कर चुके हैं। यही नहीं, अखिलेश ने तो यह भी ऐलान कर दिया है कि सीटों को लेकर भी कोई पेंच नहीं फंस सकता है, क्योंकि अखिलेश यादव को कम सीटें मिलने पर भी कोई आपत्ति नहीं है। सत्ता को लेकर भाजपा विरोधी दलों में मायावती को लेकर खिचड़ी पक रही है, लेकिन फिर वही सवाल उठता है कि आखिर मायावती क्यों चुप हैं।

मायावती की चुप्पी के सवाल पर राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मायावती एक मंझी हुई नेता हैं। उनका मानना है कि मायावती कोई बड़ा फैसला लेने वाली हैं। माना जा रहा है कि बसपा को वोट बैंक की चिंता सता रही है। वहीं, सपा और बसपा के बीच मुस्लिमों को अपने पाले में रखने की होड़ काफी पुरानी है।

माना जा रहा है कि अगर समाजवादी पार्टी मजबूत होगी तो इसका सीधा नु​कसान बसपा को ही होगा, ऐसे में मायावती को डर लगा रहा है कि लोकसभा चुनावों के बाद उनका वोट बैंक कहीं सपा के खाते में न चला जाए। ऐसे में माना जा रहा है कि मायावती 2019 नहीं बल्कि 2022 के चुनावों पर फोकस कर रही हैं। 2019 के चक्कर में कहीं 2022 का खेल न बिगड़ जाए, इसलिए मायावती का थिंक टैंक विचार कर रहा है। सूत्रों का मानना है कि मायावती जल्द ही कोई बड़ा ऐलान कर सकती हैं।

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