बसपा प्रमुख मायावती ही पीएम मोदी का विकल्प, बन रही ये रणनीति !

बसपा प्रमुख मायावती ही पीएम मोदी का विकल्प, बन रही ये रणनीति !



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Lucknow. बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती अपने राजनीतिक करियर के सबसे बुरे दिनों से गुजर रहीं है, जब उनके पास कोई पद नहीं है। मायावती ने राज्यसभा से भी इस्तीफा दे दिया था। 2014 में मोदी लहर के बाद यूपी में बसपा धराशायी हो गई थी, बसपा को एक भी सीट नहीं मिली थी।

वहीं, 2017 में के प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों में भी बसपा को मात्र 19 सीटें मिलीें थीं। ऐसे में ये भी कहा जा सकता है कि मायावती अपने करियर के 35 साल के राजनीतिक सफर में सबसे बुरे दौर में गुजर रहीं थीं, लेकिन 2018 में देश में हुए उपचुनावों और कर्नाटक विधानसभा में बसपा का शानदार प्रदर्शन रहा। चाहें वह कैराना, नूरपुर उपुचनाव हो या गोरखपुर और फूलपुर। इन उपचुनावों में मिली जीत गठबंधन को मिली जीत ने बसपा को संजीवनी देने का काम किया है।

बसपा प्रमुख मायावती  एक बार फिर न केवल यूपी बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर धमाकेदार वापसी की तैयारी कर रही है। इसके लिए हथियार भी उन्होंने मोदी विरोध को ही बनाया है। माना जा रहा है कि मायावती अब कोई ऐसा मौका नहीं छोड़ना चाहती हैं, जिससे अन्य दलों को नुकसान हो। यूपी में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन को मिली सफलता के बाद संभावनाएं जागीं है। यही नहीं, कर्नाटक में भी बसपा ने जदएस को समर्थन दिया था। जदएस सरकार ने बसपा के विधायक को मंत्री भी बनाया। माना जा रहा है कि यूपी के बाहर बसपा को कोई नेता मंत्री बना है।

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वहीं, 2019 की तैयारियों को लेकर जुटे विपक्षी दल यानि कांग्रेस के लिए मायावती भी संजीवनी साबित हो सकती हैं। दरअसल, राष्ट्रीय स्तर की पार्टी कांग्रेस के साथ-साथ सपा और रालोद के समझ में भी यह बात आ गई है कि अगर बीजेपी के बाद सबसे बड़ा कैडर किसी के पास है तो वह बसपा का ही है। इसके अलावा 22 फ़ीसदी के करीब दलित वोट बैंक भी मायावती को गठबंधन में महत्वपूर्ण बनाता है।

बसपा के एक नेता ने बताया कि मायावती ही एक ऐसा चेहरा हैं जिन्हें दलित से लेकर मुस्लिम और सवर्णों का समर्थन प्राप्त है। 2019 में मोदी को रोकने के लिए मायावती ही एक चेहरा हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि बीजेपी और मोदी से समाज का हर तबका नाराज है। लिहाजा एक ऐसे सर्वमान्य नेता की जरुरत है जो मोदी का विकल्प बन सके। इसके अलावा उनका कहना है कि गठबंधन यूपी में ही नहीं अन्य राज्यों में भी होगा। जहां बसपा का कैडर पहले से ही मौजूद है।

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माना जा रहा है कि कर्नाटक चुनावों के बाद से ही मायावती न सिर्फ यूपी में वापसी की तैयारी में जुटी हैं, बल्कि वह गठबंधन के सहारे पार्टी और खुद को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की तैयारी में हैं। यही नहीं, बसपा मध्यप्रदेश, राजस्थान और पंजाब में कांग्रेस से हाथ मिलाकर वे पांव ज़माने की जुगत में हैं।

कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर शीर्ष नेताओं के बीच बात भी हो रही है। वहीं, हरियाणा में अभय चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल के साथ गठबंधन पहले ही हो चुका है। इसी तरह बिहार, वेस्ट बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में भी गठबंधन के सहारे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को मजबूत करने की रणनीति बनाई जा रही है।

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