इन बड़ी पार्टियों ने दिया समर्थन, मायावती बनेगी पीएम पद की उम्मीदवार!

इन बड़ी पार्टियों ने दिया समर्थन, मायावती बनेगी पीएम पद की उम्मीदवार!



Lucknow. प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के करीब बाद से ही योगी सरकार की कार्यशैली से लोगों में गुस्सा नजर आ रहा है। माना जा रहा है कि इसका ही नतीजा है कि गोरखपुर, फूलपुर, कैराना समेत तीन लोकसभा सीटें और नूरपुर विधानसभा की एक सीट भाजपा ने गंवा दी है। माना जा रहा है कि दलितों में भाजपा सरकार के खिलाफ गुस्सा है।

प्रदेश में उपचुनावों में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और रालोद समेत कांग्रेस, आप यानि भाजपा विरोधी दलों ने गठबंधन किया था। इस गठबंधन ने प्रदेश में अपार सफलता भी ​हासिल की है। माना जा रहा है कि कैराना भाजपा के प्रतिष्ठित सीट मानी जा रही थी, लेकिन वहां से चुनाव हारना साफ संकेत है दलितों की नाराजगी।

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ऐसे में दलितों की नेता मायावती को लाभ हुआ है। अब बसपा को चुनाव में मिली जीत से काफी उत्साहित नजर आ रही है। हालांकि बसपा सूत्रों ने पिछले दिनों बताया था कि मायावती 2019 के लोकसभा चुनाव में कम से कम 50 सीटें जीतना चाहती हैं।

हालांकि बसपा नेताओं का मानना है कि मायावती बसपा अभी अकेले दम पर प्रदेश में लोकसभा की पचास सीटें नहीं ला सकती है, ऐसे में सहयोगी दलों से सहायता ली जा सकती है। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि बसपा को अन्य दलों का सहयोग मिला और पचास सीटें जीतने में कामयाब हुई तो बसपा चीफ मायावती प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी न पेश करेंगी। हालांकि बसपा सूत्रों का मानना है कि 2019 के चुनावों में मायावती ही किंगमेकर साबित हो सकती हैं।

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वहीं, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैराना और नूरपुर में हुई जीत के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। अखिलेश ने बसपा समेत तमाम छोटे दलों को जीत की बधाई दी थी। उन्होंने संकेत​ दिया था कि आगामी चुनावों में बसपा और सपा गठबंधन कर सकती है।

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हालांकि कैराना चुनावों के बाद से ही माना जा रहा है कि रालोद भी इस गठबंधन में शामिल हो सकता है। हालांकिे कांग्रेस के बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है। माना जा रहा है कि प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस, सपा और बसपा में बात फंस सकती है। फिलहाल अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

वहीं, लोकसभा चुनाव से पहले यानि इस साल के अंत तक तीन प्रदेशों मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस कर्नाटक वाला फार्मूला अपना सकती है। कर्नाटक में कांग्रेस ने भाजपा को पुरजोर कोशिश की और उसमें सफल भी हुई। कांग्रेस ने जदएस को समर्थन दे दिया।

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हालांकि मायावती और जदएस का पहले से ही गठबंधन है। ऐसे में कांग्रेस भाजपा को रोकने के लिए आगामी विधानसभा चुनावों में दलित वोटों को अपने पाले में लाने के लिए बसपा का सहारा ले सकती है। अगर बसपा और कांग्रेस के गठबंधन से तीनों राज्यों में भाजपा को सत्ता से बाहर करने में सफल होती है तो मायावती 2019 के लोकसभा चुनाव में किंगमेकर साबित हो सकती हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री पद के दावेदार भी हो सकती हैं, क्योंकि मायावती का कई दल समर्थन कर सकते हैं।

 


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