सडक़ हादसे में एक दर्जन मौत के बाद नहीं चेता पुलिस प्रशासन

सडक़ हादसे में एक दर्जन मौत के बाद नहीं चेता पुलिस प्रशासन



सडक़ हादसे में एक दर्जन मौत के बाद नहीं चेता पुलिस प्रशासन
सडक़ हादसे में एक दर्जन मौत के बाद नहीं चेता पुलिस प्रशासन

गोला गोकर्णनाथ, खीरी। कुछ दिन पूर्व उचौलिया कस्बे में ढाबे के पास खड़े ट्रक में एक डग्गामार मैजिक पीछे से घुसने से 13 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बावजूद  पुलिस प्रशासन नहीं चेता। डग्गामार वाहन क्षमता से अधिक सवारी बैठाकर थानों के सामने से खुलेआम फर्राटा भर रहे हैं।

क्षेत्र के विभिन्न मार्गों पर चलने वाले डग्गामार वाहन चालक यात्रियों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। क्षमता से दोगुनी यात्रियों को ठूंसकर भरने के अलावा कई यात्रियों को दोनों तरफ और पीछे के पायदानों पर लटकाकर दौड़ते डग्गामार वाहनों को दिन में किसी भी समय देखा जा सकता है। फिर भी रोड पर पडऩे वाले थानों की पुलिस सब कुछ देखते हुए भी अनजान है। गोला से अलीगंज, लखीमपुर, मोहम्मदी, खुटार व बांकेगंज मार्गों पर दर्जनों डग्गामार वाहन चल रहे हैं। इन वाहनों को चलाने के लिए चालकों का प्रशिक्षित होना भी जरूरी नहीं है।

यात्रियों से हो रही अवैध वसूली

रोड पर चलने वाले इन डग्गामार वाहनों के लिए एआरटीओ से प्रतिवर्ष फिटनेस भी लेना जरूरी नहीं है। जरूरी है तो प्रतिमाह पुलिस, एआरटीओ और अड्डों पर ठेकेदारों को महीना देना। यही कारण है कि इन मार्गों पर यात्रियों से किराया भी अधिक वसूला जा रहा है। डग्गामार वाहनों से हो रहे सडक़ हादसे चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। हादसों को रोकने के इंतजाम कागजी घोड़ा साबित हो रहे हैं। नतीजन दिनों दिन हादसों की संख्या बढ़ रही है और परिवार के परिवार उजड़ रहे हैं। रोजाना कहीं न कहीं हादसों में लोगों की जान जा रही है।

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हादसे बने चिंता का विषय

यातायात निदेशालय उत्तर प्रदेश से जारी आंकडे बताते हैं कि प्रति वर्ष हादसे और मरने वालों की संख्या बढ़ती गई। हादसों पर चिंता जताते हुए उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित कमेटी आन रोड सेफ्टी ने प्रदेश में घटित घटनाओं और इनमें होने वाली मौतों पर चिंता जताते हुए अंकुश लगाने के कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन व्यवस्थाएं कागजों तक ही सीमित होकर रह गई हैं और रोजाना कहीं न कहीं हादसों में मौतें हो रही हैं। मोटर वाहनों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होने से सडक़ दुर्घटनाओं और मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है।

पुलिस की मिलीभगत से हो रहा संचालन

पुलिस और परिवहन विभाग की मिलीभगत से दौड़ रहे डग्गामार वाहनों में से तमाम अपनी आयु पूरी कर चुके हैं। हालत यह है कि इन वाहनों में हॉर्न को छोडक़र सब कुछ बजता है। कई वाहनों पर नंबर प्लेट ही नहीं है। कई वाहन जो बिना फिटनेस और टैक्स चुकाए ही धड़ल्ले से चल रहे हैं। ऐसे वाहन लगभग रोज की दुर्घटनाग्रस्त होते हैं, लेकिन ऊपरी कमाई के चककर में वाहन स्वामियों को लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ की छूट मिली हुई है।

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बिना नम्बर और प्रेस लिखे हैं वाहन

मिलीभगत होने के कारण अधिकतर डग्गामार मैजिक चालक बिना नम्बर प्लेट के ही वाहन सडक़ों पर दौड़ा रहे हैं और हादसा होने के बाद फरार होने में भी कामयाब हो जाते हैं। यही नहीं, उक्त वाहनों पर प्रेस भी लिखा हुआ है।


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