सरकार और चीनी मिल की मार के बाद किसानों पर प्रकृति की आपदा

सरकार और चीनी मिल की मार के बाद किसानों पर प्रकृति की आपदा



सरकार और चीनी मिल की मार के बाद किसानों पर प्रकृति की आपदा
सरकार और चीनी मिल की मार के बाद किसानों पर प्रकृति की आपदा

गोला गोकर्णनाथ, खीरी। सोमवार को हुई बरसात ने खेतों में खड़ी गेहूं की पकी फसल को गिरा दिया है। वहीं कटी हुई फसल खेत में पानी भरने से गीली हो गई। एक दिन की इस बरसात ने किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। अब फसल सूखने में एक सप्ताह का समय लगेगा और इसके खराब होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि पानी लगने से गेहूं का दाना खराब होने का खतरा बढ़ गया है। पानी में भीगे गेहूं के मार्केट में उचित दाम भी नहीं मिल सकेंगे।

गन्‍ना भगुतान न मिलने से परेशान हैं किसान

तराई क्षेत्र होने के कारण जिले में आम तौर पर गेहूं, धान और गन्ना की खेती बडे पैमाने पर की जाती है, जबकि कुछ इलाकों में लाही और सरसों की खेती भी होती है। सरकार और चीनी मिलों द्वारा बकाया गन्ना मूल्य भुगतान और उनकी वादा खिलाफी से परेशान कुछ किसानों ने इस वर्ष गन्ने को औने पौने दाम पर बेचकर गेहूं की फसल से उम्मीदें लगी थीं।

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किसानों ने इसके लिए भरपूर मेहनत भी की थी और पिछले कुछ दिनों से खेतों में लहलहा रही गेहूं की फसल इसका प्रमाण भी थी। उम्मीद भी यही जताई जा रही थी कि इस बार गेहूं की फसल का औसत उत्पादन भी बढ़ेगा। किसानों की इन उम्मीदों पर सोमवार को शुरू हुई बारिश ने पानी फेर दिया।

आंधी और बरसात ने किसानों के अरमानों पर फेरा पानी

बरसात और इसके साथ चलीं तेज हवाओं ने किसानों की गेहूं की फसल को चौपट कर दिया। अधिकतर ग्रामीण इलाकों में फसल पलट गई है। आंधी के साथ हुई बरसात से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। खेतों की कटाई का  समय होने से अधिकांश किसानों का गेहूं खेतों में ही पडा रहकर भीग जाने से बालियों के काली पड जाने की आशंका से किसान परेशान हैं।

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अंधड भरी हवाओं के साथ गेहूं की फसल खेतों में गिर जाने से उसकी कंबाइन मशीन से कटाई करवाना भी मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कहा कि आंधी और बरसात ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है। उनके गेहूं की फसल की कटाई होने के बाद मडाई की तैयारी हो रही थी इसी बीच बरसात से सब भीग गया। किसान जगदीश प्रसाद वर्मा ने कहा कि आंधी और बरसात से जमा पूंजी बचाने का संकट आ गया है।

गेहूं के बोझ को खोलकर सुखाने में लगे रहे किसान

सोमवार को हुई बारिश के चलते खलिहानों में रखे बोझ पूरी तरह से भींगने व जमीन के सतह पर पडे बोझ में अनाज अंकुरित होने की आशंका के चलते किसानों के माथे पर चिंता की लकीर दिखाई देने लगी है। फसलों की स्थिति देख किसान खलिहानों में जाकर माथा पकड रहे हैं।

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अगर लगातर धूप निकलती रही तो कम से कम चार पांच दिनों के बाद ही गेहूं की कटाई और मडाई का कार्य शुरू हो पायेगा।क्षेत्र में भारी बरसात हो जाने के कारण सोमवार को खेत लबालव हो गये थे।  पानी सूखने के बाद मिटटी में नमीं ज्यादा है, जिसके कारण कम्बाईन अभी खेतों में नहीं पहुंच सकेगी।


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