बाल रोग विशेषज्ञ डा. वी कुमार वर्मा का निधन, शोक की लहर

बाल रोग विशेषज्ञ डा. वी कुमार वर्मा का निधन, शोक की लहर

चिकित्सा जगत को हुई अपूर्णनीय क्षति


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चिकित्सा जगत को हुई अपूर्णनीय क्षति

 

गोला गोकर्णनाथ, खीरी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अधीक्षक पद पर तैनात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वी कुमार वर्मा का बीमारी के चलते लखनऊ के पीजीआई में इलाज के दौरान उनका सोमवार की शाम निधन हो गया। निधन की खबर मिलते ही शहर में शोक की लहर दौड़ गई और हजारों की संख्या में उनके नर्सिग होम पर तांता लग गया। मंगलवार की दोपहर में मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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डॉ. वी कुमार वर्मा सीतापुर जिले के ग्राम सिमरी मोति मधुपुर के निवासी थे। इनका विवाह प्रमुख समाजसेवी व चिकित्सक स्व. श्रीचंद वर्मा की पुत्री पंकज वर्मा से 15 फरवरी 1997 में विवाह हुआ था। इसके बाद डॉ. वी कुमार वर्मा की पहली नियुक्त गोला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 28 जनवरी 1997 को हुई थी। विभिन जिलों में रहने के बाद डॉ. वर्मा 14 अप्रैल 2016 को गोला में तैनाती हो गई।

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अक्टूबर 2017 में अचानक स्वास्थ्य खराब हो जाने के कारण मेडिकल अवकाश पर दिल्ली में उपचार कराने चले गये। इसके बाद डॉ. वी कुमार वर्मा ने 30 जनवरी 2018 को ईएल अवकाश ले लिया। कुछ दिन पूर्व हालत बिगड़ जाने के कारण इन्हें मुम्बई ले जाया गया था और वहां से आने के बाद एक सप्ताह पूर्व लखनऊ पीजीआई में भर्ती कराया गया, जहां सोमवार की शाम साढे 6 बजे अन्तिम सांस ली। डॉ. वी. कुमार अपने पीछे पत्नी पकंज वर्मा, 16 वर्षीय पुत्री दीर्घा व पुत्र अरूष छोड़ गये हैं। मंगलवार की दोपहर यहां मुक्तिधाम में उनके पार्थिव शरीर को उनके पुत्र आयुष ने मुखाग्नि दी।

बता दें कि डॉ. वी. कुमार मिलनसार एवं मृदु स्वभाव के कारण सामाजिक संगठनों, चिकित्सकों एवं आम मरीजों के लिए बेहद प्रिय माने जाते थे और उनके निधन से चिकित्सा जगत को अपूर्णनीय क्षति हुई है। अंतिम सस्कार में राज्यसभा सांसद रविप्रकाश वर्मा, पूर्व विधायक विनय तिवारी, रामसरन, धर्मेंद्र गिरि मोंटी, समाजसेवी वरूण अग्रवाल, केशव अग्रवाल, प्रहलाद पटेल, अरविंद गुप्ता रामजी, मुकेश राठी, डा. रवींद्र नाथ, डा.आर.पी. मित्रा, डॉ. आशुतोष गुप्ता सहित प्राइवेट मेडिकल प्रेक्टीशनर्स एसोसियेशन व तमाम समाजसेवी संगठनों के लोग मौजूद रहे।

गरीबों की सेवा करना धर्म था

क्षेत्र में स्व. श्रीचंद वर्मा गरीबों के मसीहा कहे जाते है। उन्होंने अपने चिकित्सीय जीवन में गरीब और मजलूमों की नि:स्वार्थ सेवा करना ही धर्म मााना था। हार्ट अटैक से निधन हो जाने के बाद उनके दामाद स्व. डॉ. वी कुमार वर्मा ने उनका क्लीनिक संभाल लिया और धीरे-धीरे उनके ही नक्से कदम पर चलते हुये गरीबों के सेवा करने के उद्देश्य से लखीमपुर रोड स्थित श्रींचद मेमोरियल हास्पिटल के नाम से स्थापना कर दी, जहां हर तरह की हर संभव सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया यहां मरीजों की लिए 24 घंटे इमरजेंसी व्यवस्था थी। श्री वर्मा क्षेत्र के मरीजो से घुल मिल गये और उन्हें भी लोगो ंने समाजसेवी की संज्ञा देना शुरू कर दिया था।

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